सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
जमानियां। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या या माघ अमावस्या पर सैकड़ों श्रद्धालु गणों ने कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ घाट गंगा नदी में डुबकी लगाई। और गरीबों में पुण्य दान की। बताया जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन गंगा नदी सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने, भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। युवा ब्राह्मण पंडित उद्धव पांडेय ने बताया कि सनातन धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना आध्यात्मिक महत्व होता है। परंतु अमावस्या को विशेष रूप से स्नान, दान, तर्पण और पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इन्हीं अमावस्या तिथियों में मौनी अमावस्या को अन्य अमावस्या तिथियों की तरह ही पुण्यदायी अमावस्या कहा गया है। उन्होंने बताया कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाने वाली यह तिथि आत्मशुद्धि, मौन साधना और पितरों के कल्याण का अनुपम अवसर प्रदान करती है। जिसमें मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य साधक को विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है। कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। उद्धव ने बताया कि मौनी अमावस्या 18 जनवरी को सैकड़ों श्रद्धालु गण गंगा नदी में डुबकी लगाकर मनाई। अमावस्या तिथि का शुभारंभ 18 जनवरी की रात 12 बजकर 03 मिनट से होगा और इसका समापन 19 जनवरी की रात 1 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, यह पर्व 18 जनवरी को मनाया जाएगा। मौनी अमावस्या के दिन गंगा नदी सहित यमुना, नर्मदा, सरयू अथवा किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके साथ ही स्नान के समय पितरों का स्मरण करते हुए। उन्हें जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं। परिवार को आशीर्वाद देते हैं। और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। मान्यता है कि इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।