सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
जमानियां। 3 को शब-ए-बारात का त्योहार मनाया जाएगा। मुस्लिम धर्म के लोग मस्जिदों में अल्लाह की इबादत किया जाता है। शुक्रवार को शाही जामा मस्जिद में मौलाना तनवीर रजा ने अपने तकरीर पेश करते हुए। कहा कि शब-ए-बारात का त्योहार इस्लाम के अहम त्योहारों में से एक हैं। इस दिन लोग रात में जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं। उन्होंने बताया कि शब ए बारात इस्लामिक माह 15 शाबान जो की इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार आठवां महीना है। इसी रात को शब ए बारात कहलाती है। जिसका मतलब होता है। जहन्नुम से आजाद करना। इस दिन लोगों में उत्साह देखने को मिलता है। घरों में पकवान बनते हैं। और पूरी रात अल्लाह की इबादत की जाती है। शब ए बारात को लेकर लोगों में उत्साह है। रजा ने कहा कि शब ए बारात पर मुस्लिम बंधु पूरी रात में मस्जिदों में जाकर अल्लाह की इबादत करें। साथ ही अपने पूर्वजों की मगफिरत की दुआ भी करें। मौलाना तनवीर रजा ने कहा कि शब ए बारात पर मुस्लिम भाइयों को चाहिए कि अपने पूर्वजों की कब्रिस्तान पहुंचकर उनके मगफिरत की दिल लगाकर दुआ करना चाहिए। और इस दिन जरूरतमंद लोगों को जकात सतका( दान ) भी किया जाए। बताया जाता है। कि शब ए बारात पर रोजे की फजिलियत। जिस रात का मुस्लिम धर्म के लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। वह रात आने वाली है। मुस्लिम बंदे मस्जिदों और अपने घरों में शब ए बारात पर रतजगा कर इबादत करेंगे। इसके साथ दरगाहों, कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों एवं परिजनों की कब्रों पर दरूद फातिहा भी पढ़ेंगे। वहीं घरों में महिलाऐं और बच्चे भी नमाजें और कुरआन पढ़ेगी। और शब ए बारात पर रोजा भी रखा जाता है। हालांकि यह नफली रोजा है। इसे रखने से सवाब मिलता है। लेकिन न रखने पर कोई गुनाह भी नहीं पड़ता। शब ए बारात का मतलब है। आजाद करना। इस रात का इंतेजार हर मुस्लिम बंदे को रहता है। कहा जाता है। कि इस रात अल्लाह इंसान के पिछले आमालों (काम) को ध्यान में रखकर उसके आने वाले सालों की किस्मत लिखता है। कौन कब पैदा होगा। और कौन कब मरेगा इसका रिकॉर्ड भी इस दिन लिखा जाता है। इबादत और रहमतों की रात ‘शब ए बारात गुनाहों से सच्ची तौबा करने वाला है। गुनाहों से तौबा की रात बंदों पर बरसती है अल्लाह की रहमत। फिजूल खर्च से बचना चाहिए। शब ए बारात की नमाज रोजाना होने वाली नमाजों से अलग होती है। इस रात में अपने घरवालों के साथ साथ पूरे देश की हिफाजत उन्नति शान्ति अमन व अमान के लिए दुआ की जाती है। शब ए बारात पर लोग अपने घरों को सजाते हैं। घरों में खुशबू लगाई जाती है। तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। और लोगों को खिलाया जाता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंद लोगों को सतका जकात (दान) भी किया जाता है। आतिशबाजी और फिजूल खर्च करने से बचना चाहिए बहुत जरूरी है।