आज त्रिवेणी मार्ग स्थित श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन् सरस्वती जी महाराज के माघ मेला शिविर के धर्म संवाद में आज त्रिवेणी मार्ग स्थित श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज के माघ मेला शिविर के धर्म संवाद पण्डाल में आयोजित सन्त सम्मेलन में शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि देश में आईईएस, आईपीएस हों या अन्य विभागों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी 60 वर्ष की उम्र होते ही काम करने की क्षमता नहीं रखते और उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया जाता है तो नेता 60 वर्ष की उम्र होने के बाद काम कैसे कर सकते हैं । इसलिए नेताओं को भी 60 वर्ष की उम्र होते ही सेवानिवृत्त कर देना चाहिए । देश में बढ़ रही अराजकता, अपसंस्कृति को रोकने के लिए शिक्षा में प्राथमिक से लेकर इण्टरमीडिएट तक संस्कृत और नैतिक शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि देश को समर्पित, गुणवान तथा चरित्रवान नागरिक मिल सकें ।
शंकराचार्य जी महाराज ने यज्ञ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यज्ञ (हवन) भारतीय संस्कृति का मूल आधार है, जो मंत्रोच्चार और पवित्र अग्नि के माध्यम से देवताओं को आहुति अर्पित कर वातावरण को शुद्ध, मानसिक शांति और आत्म-शुद्धि प्रदान करता है। यह सात्विकता का संचार, रोगों का नाश, और भौतिक-आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है। इसे ‘कामधेनु’ कहा गया है, जो बाधाओं को दूर करता है।
यज्ञ सामग्री से निकलने वाला धुआँ हवा के रोग कीटाणुओं को नष्ट करता है, जिससे वातावरण की शुद्धि और स्वास्थ्य में सुधार होता है । यज्ञ यह आत्मा को शुद्ध करता है, मन को कुविचारों से बचाता है, और परमात्मा से जोड़ता है । शास्त्रों के अनुसार, यज्ञ से देवता प्रसन्न होते हैं, जिससे वर्षा, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है । इतना ही नहीं यज्ञ जड़ और चेतन दोनों में सात्विकता का संचार करता है और समाज में एकता की भावना लाता है । इसीलिए वेदों (यजुर्वेद) में यज्ञ को जीवन का मुख्य उद्देश्य और कर्त्तव्य बताया गया है । यज्ञ का पुण्य फल कभी नष्ट नहीं होता और यह सभी बाधाओं को दूर करने वाला होता है । इस अवसर पर स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती, स्वामी प्रकृष्टानन्द सरस्वती आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये । इस अवसर पर कोतवाल स्वामी नारद आश्रम, कोतवाल स्वामी अवनीश आश्रम सहित सैकड़ों दण्डी सन्यासियों एवम् श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही ।