नई दिल्ली/वाराणसी।
देशभर में आज बाबा संत गुरु रविदास जयंती श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ धूमधाम से मनाई जा रही है। माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर पड़ने वाली इस जयंती को लेकर उत्तर भारत सहित कई राज्यों में विशेष आयोजन किए गए। मंदिरों, गुरुद्वारों और रविदास स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भजन-कीर्तन, शोभायात्रा, सत्संग और लंगर के माध्यम से बाबा रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
बाबा संत गुरु रविदास भक्ति आंदोलन के महान संतों में से एक थे। उन्होंने अपने जीवन और वाणी से समाज को समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रही हैं।
वाराणसी में विशेष आयोजन, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
बाबा रविदास की जन्मस्थली वाराणसी में जयंती के अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्री गुरु रविदास जन्मस्थान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में अनुयायी वाराणसी पहुंचे। मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन और अमृतवाणी का पाठ किया गया।
श्रद्धालुओं ने बाबा रविदास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और समाज में प्रेम, समानता और एकता बनाए रखने का संकल्प लिया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
शोभायात्राओं से गूंजे शहर, भक्ति गीतों पर झूमे लोग
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में रविदास जयंती के मौके पर भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं। हाथों में झंडे, बैनर और बाबा रविदास की तस्वीरें लिए श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए।
शोभायात्राओं के दौरान “जो बोले सो निहाल”, “बाबा रविदास अमर रहें” जैसे नारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों और ट्रस्टों की ओर से भंडारे और लंगर का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने दी शुभकामनाएं
रविदास जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने अपने संदेशों में कहा कि बाबा संत गुरु रविदास की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को जाति-भेद, ऊंच-नीच और भेदभाव से मुक्त करने की प्रेरणा देती हैं।
नेताओं ने बाबा रविदास के “बेगमपुरा” के सपने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक ऐसे समाज की कल्पना है जहां कोई दुखी न हो, कोई भेदभाव न हो और सभी को समान अधिकार मिले।
बाबा रविदास का जीवन और दर्शन
संत गुरु रविदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। वे बचपन से ही संत प्रवृत्ति के थे और उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। बाबा रविदास ने कर्म को प्रधानता दी और ईश्वर भक्ति को आत्मशुद्धि का माध्यम बताया।
उनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में भी सम्मिलित है, जो उनके विचारों की महानता को दर्शाती है। उन्होंने अपने दोहों और पदों के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि ईश्वर सभी में समान रूप से निवास करता है और किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति या जन्म के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।
युवाओं में भी दिखा उत्साह
इस बार की रविदास जयंती में युवाओं की भागीदारी भी खास तौर पर देखने को मिली। कई स्थानों पर युवाओं ने रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और जरूरतमंदों को भोजन वितरण जैसे सामाजिक कार्य किए। सोशल मीडिया पर भी बाबा रविदास के विचारों, दोहों और संदेशों को बड़े पैमाने पर साझा किया गया।
युवाओं का कहना है कि बाबा रविदास के विचार आज के दौर में और भी अधिक जरूरी हो गए हैं, जब समाज को एकजुट रखने की आवश्यकता है।
प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
रविदास जयंती के मद्देनजर कई शहरों में यातायात व्यवस्था में बदलाव किए गए। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा और ड्रोन के जरिए भी निगरानी की गई।
रविदास जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देने वाला दिन है। बाबा रविदास ने अपने जीवन से यह सिखाया कि इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है, न कि उसकी जाति या वर्ग से।
आज के दिन उनके अनुयायी यही संकल्प लेते हैं कि वे बाबा रविदास के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में प्रेम, भाईचारा और समानता को बढ़ावा देंगे।
कुल मिलाकर, बाबा संत गुरु रविदास जयंती देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। यह पर्व न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि एक ऐसे समाज के निर्माण का संदेश भी देता है, जहां सभी समान हों और मानवता सर्वोपरि हो।
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