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लीजिए साहिब, हवस के इस नंगे नाच का सबसे घिनौना और कड़वा सच अब सामने आया है। एप्सटीन के उस ‘पाप-लोक’

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लीजिए साहिब, हवस के इस नंगे नाच का सबसे घिनौना और कड़वा सच अब सामने आया है। एप्सटीन के उस ‘पाप-लोक'(Luxury Island) पर किसी रईसजादे या अमीर घर की बेटी का यौन शोषण नहीं हुआ। वहाँ सिर्फ उन्हें नोचा गया जो बेचारी थीं, गरीब थीं और लाचार थीं।

​👉 गरीबी का ‘ब्लूप्रिंट’:

जांच में खुलासा हुआ है कि शिकार का तरीका एकदम ‘कॉर्पोरेट’ था। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चियों को मसाज, घरेलू काम या पार्ट-टाइम जॉब का लालच देकर बुलाया जाता था। उन्हें क्या पता था कि पेट की भूख मिटाने के लिए वो जहाँ जा रही हैं, वहाँ रईस दरिंदे उनकी रूह को ही नोच खाएंगे। अमीरों को पता था कि गरीब की आवाज़ कोई नहीं सुनता।

​☝🏾 मैक्सवेल का ‘शैतानी पिरामिड’:

इस पूरे खेल की ‘मैनेजर’ थी घिसलेन मैक्सवेल (Ghislaine Maxwell)। उसने शोषण का एक ‘पीयर-रिक्रूटमेंट सिस्टम’ बनाया था। यानी एक पीड़ित बच्ची को मजबूर किया जाता था कि वो दूसरी मासूम बच्चियों को फंसा कर लाए। शिकार को ही शिकारी बना दिया गया—इससे बड़ी क्रूरता और क्या होगी?

​लेकिन साहिब, ऊपर वाले की चक्की धीरे चलती है, पर पीसती बहुत बारीक है! इसी घिनौने काम के लिए ‘मैडम मैक्सवेल’ को 20 साल की सजा मिली है और आज वो टेक्सास की जेल में सड़ रही है। सबक साफ है—गरीब की हाय खाली नहीं जाती, चाहे तुम पाताल में भी अपना अड्डा बना लो!

ग्लैमर की चकाचौंध के पीछे छिपी इस दरिंदगी और अमीरों के काले कारनामों को ‘मेरे अंदाज़’ में जानने के लिए मुझे अभी Follow करें। अगर आपको भी लगता है कि गरीबों का शोषण सबसे बड़ा पाप है, तो दुनिया को सच दिखाएं!

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