सुकन्या सिंह की रिपोर्ट
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विधि संकाय द्वारा शुक्रवार को एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोज किया गया, जिसमें न्यायपालिका, मानवाधिकार एवं अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जांच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का आयोजन विधि संकाय परिसर में अपराह्न 03:00 बजे से किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएचयू के माननीय कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने की। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री विनोद दिवाकर उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के विशेष प्रतिवेदक श्री उपेन्द्र बघेल, आईपीएस ने सहभागिता की।
माननीय न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने अपने विशेष व्याख्यान में “विकसित भारत के लिए सहयोगात्मक शासन में न्यायपालिका की भूमिका” विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुशासन की अवधारणा को सशक्त बनाने में न्यायपालिका की सक्रिय, संवेदनशील एवं संतुलित भूमिका अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विधि के छात्रों को संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण हेतु सजग एवं प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
वहीं श्री उपेन्द्र बघेल, आईपीएस ने “अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जांच और अभियोजन की कुछ अंतर्दृष्टि” विषय पर अपने अनुभव साझा करते हुए वैश्विक स्तर पर अपराध अनुसंधान, मानवाधिकार संरक्षण एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जटिलताओं को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात स्वागत भाषण, विशिष्ट व्याख्यान, संवाद सत्र तथा अध्यक्षीय संबोधन का आयोजन किया गया। संवाद सत्र में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अतिथियों से विभिन्न विधिक एवं समसामयिक विषयों पर प्रश्न पूछे।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे व्याख्यान कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं तथा उन्हें विधि के क्षेत्र में व्यापक समझ विकसित करने में सहायक होते हैं