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अमेठी में ‘अन्याय’ की इंतहा: सरकारी ड्यूटी निभाने पर BLO निशा यादव की पिटाई, 82 साल की बीमार नानी पर भी FIr

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अमेठी में ‘अन्याय’ की इंतहा: सरकारी ड्यूटी निभाने पर BLO निशा यादव fir

अमेठी (इंद्र यादव) उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहाँ एक महिला सरकारी कर्मचारी (BLO) को न केवल अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करने की सजा मिली, बल्कि पुलिस ने उल्टा उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने BLO की 82 वर्षीय बुजुर्ग नानी को भी आरोपी बना दिया है, जो पिछले कई सालों से बिस्तर से उठ तक नहीं सकतीं।

विवाद की जड़: ‘श्री’ न लगाना पड़ा भारी

घटना की शुरुआत तब हुई जब बूथ संख्या 249 (नौगिरवा) की बीएलओ निशा यादव सरकारी काम (SIR फॉर्म भरने) के दौरान वोटर्स की लिस्ट तैयार कर रही थीं। तभी गांव के ही दयाशंकर कश्यप नाम के व्यक्ति ने उन पर दबाव बनाया कि उनके पिता के

नाम के आगे ‘श्री’ लगाया जाए।

निशा के अनुसार, ट्रेनिंग में उन्हें नाम के आगे ऐसे किसी विशेष संबोधन लगाने के निर्देश नहीं मिले थे। जब उन्होंने इससे इनकार किया, तो दबंग आगबबूला हो गया और उनके सरकारी दस्तावेज फाड़ दिए।

दबंगों का घर पर हमला और पुलिस की ‘उल्टी’ कार्रवाई

निशा यादव का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 2 तारीख की रात दयाशंकर करीब 10-12 लोगों के साथ उनके घर पहुँचा। वहाँ निशा, उनकी बहन और उनकी बुजुर्ग नानी के साथ जमकर मारपीट और अभद्रता की गई।

जब निशा न्याय की गुहार लगाने पुलिस के पास पहुँचीं, तो उन्हें मदद मिलने के बजाय एक गहरा सदमा लगा। पुलिस ने दबंगों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा निशा, उनकी बहन और उनकी 82 साल की बीमार नानी के खिलाफ FIR दर्ज कर दी।“मेरी नानी सालों से बिस्तर पर हैं, वो हिल तक नहीं सकतीं। पुलिस कहती है कि हम ही दबंग हैं। जब हम थाने जाते हैं, तो हमें डांटकर भगा दिया जाता है।” — निशा यादव, पीड़ित BLO

प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल

यह मामला न केवल अमेठी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक महिला कर्मचारी सरकारी काम के दौरान कितनी असुरक्षित है।

क्या 82 साल की बिस्तर पर पड़ी महिला किसी के साथ मारपीट कर सकती है?

क्या सरकारी कागजों पर ‘श्री’ न लिखना इतना बड़ा अपराध है कि एक महिला कर्मचारी को पीटा जाए?

आखिर पुलिस ने बिना जांच किए पीड़ित पक्ष पर ही मुकदमा क्यों थोप दिया!

फिलहाल, निशा यादव ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और उनके परिवार पर लगा झूठा केस वापस लिया जाए।

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