कार्यालय प्रतिनिधि
काल भैरव को भगवान भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप माना जाता है। काशी (वाराणसी) में इन्हें “कोतवाल” (रक्षक/प्रशासनिक प्रमुख) का दर्जा प्राप्त है। काशी के कोतवाल क्यों कहलाते है
मान्यता है कि काशी में प्रवेश करने और वहां निवास करने के लिए काल भैरव बाबा की अनुमति आवश्यक होती है।
👉 बिना इनके आशीर्वाद के काशी में रहना या मोक्ष प्राप्त करना कठिन माना जाता है।
इसलिए उन्हें काशी का रक्षक और न्यायाधीश भी कहा जाता है।
📖 पौराणिक कथा
शास्त्रों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और भगवान शिव के बीच विवाद हुआ।
तब शिव जी ने अपने क्रोध से काल भैरव को उत्पन्न किया।
👉 काल भैरव ने ब्रह्मा जी का अहंकार समाप्त करने के लिए उनका एक सिर काट दिया।
इस कारण उन्हें “पाप नाशक और न्याय देने वाले देवता” माना जाता है।
🛕 काशी में काल भैरव मंदिर का महत्व
काल भैरव मंदिर काशी का अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है।
👉 यहाँ दर्शन करने से:
पापों का नाश होता है
भय और बाधाएं दूर होती हैं
न्याय और सुरक्षा मिलती है
📿 खास बात:
यहाँ भक्त काला धागा (भैरव रक्षा सूत्र) धारण करते हैं, जिसे सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
🌙 विशेष दिन
👉 काल भैरव अष्टमी के दिन यहाँ विशेष पूजा होती है
👉 इस दिन भैरव बाबा की पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं