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जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं को पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा

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जमानियां। कस्बा बाजार स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं को पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें घर से खाना मंगाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और अनदेखी के कारण नाश्ता, दूध और भोजन जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सरकारी चिकित्सकों और संविदा कर्मियों के मिली भगत से द्वारा लुट खसौट जारी है। जो सीधे सीधे जननी सुरक्षा योजना का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। बताया जा रहा है। कि सरकारी प्रावधानों के अनुसार प्रसव के बाद (सामान्य में 48 घंटे, ऑपरेशन में 7 दिन) महिलाओं को पौष्टिक भोजन मिलना अनिवार्य है। लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही और स्वास्थ्य कर्मियों घोर उदासीनता के कारण प्रसूताओं को भुखमरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में परिजन बाहर से खाना मंगाने को मजबूर हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के नगर अध्यक्ष इजहार खान, जिला व्यापार मंडल के युवा उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता नगर उपाध्यक्ष अमन खान गांधी, वीरेंद्र कुमार, इमरान नियाजी, पंकज निगम, शांति एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार अहमद खान वारसी सहित आदि लोगों ने बताया कि मुख्यचिकित्साधिकारी से मिलकर भोजन नहीं मिलने वाली गंभीर समस्या को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि डिलेवरी हुई महिलाओं को पहले छोड़ने पर1000 से 1200 सौ रुपया वसूल करने पर छोड़ देते है। संविदा कर्मी और सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण लोगों को आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि इस अव्यवस्था के कारण महिलाओं को प्रसव के बाद आवश्यक पोषण नहीं मिल पा रहा है। जो उनके और नवजात के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यही नहीं जननी सुरक्षा योजना तार तार होने लगी है। जिसके कारण प्रसूताओं महिलाओं के लिए काफी दिक्कत होने लगी है। सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया 

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