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जिलाधिकारी ने संभावित बाढ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारी समय से पूर्व ही किए जाने पर दिया जोर

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दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट                        वाराणसी जिलाधिकारी ने संभावित बाढ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारी समय से पूर्व ही किए जाने पर दिया जोर

*जनपद में स्थापित बाढ़ राहत शिविरों का पुनः सत्यापन करते हुए आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त भवनों का चिन्हांकन सुनिश्चित किया जाए-सत्येंद्र कुमार*

*रामपुर ढाब एवं ढेलवरिया में भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए स्थायी बाढ़ राहत शिविर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किए जाने का भी दिया निर्देश* वाराणसी। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में बाढ़ स्टियरिंग कमेटी की बैठक सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) द्वारा जनपद में विगत वर्षों में आई बाढ़ की स्थिति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया तथा अवगत कराया गया कि जनपद में मुख्यतः गंगा, गोमती एवं वरुणा नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। गंगा नदी का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर, खतरे का स्तर 71.26 मीटर तथा उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 73.90 मीटर निर्धारित है।  जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार द्वारा निर्देशित किया गया कि सामने घाट स्थित फ्लैपर गेट की समयबद्ध साफ-सफाई कराई जाए तथा कूड़ा-कचरा के कारण अवरोध उत्पन्न न हो, इसके लिए गेट के ऊपर जाली स्थापित की जाए। आवश्यकतानुसार जनरेटर एवं पम्पों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, अस्सी नदी पर फ्लैपर गेट निर्माण का प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत किया जाए। रामपुर ढाब एवं ढेलवरिया में भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए स्थायी बाढ़ राहत शिविर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।

जनपद में स्थापित बाढ़ राहत शिविरों का पुनः सत्यापन करते हुए आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त भवनों का चिन्हांकन सुनिश्चित किया जाए। बाढ़ राहत से संबंधित समस्त निविदाएं, जैसे खाद्यान्न, डिग्निटी किट, भूसा आदि, समयबद्ध रूप से पूर्ण कर ली जाएं, जिससे आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य संपादित किया जा सके। उन्होंने समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि विगत वर्षों के अनुभव के आधार पर क्षेत्रीय भ्रमण कर यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि बाढ़ से संबंधित कोई भी कार्य लंबित न रहे। बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत चौपालों का आयोजन कर आम जनमानस को जागरूक किया जाए। उन्होंने पशुपालन विभाग को निर्देशित किया गया कि 15 जून से पूर्व आवश्यक औषधियों का भंडारण एवं टीकाकरण कार्य पूर्ण कर लिया जाए। स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक बाढ़ राहत शिविर पर चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने तथा सर्पदंश की संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए समस्त चिकित्सालयों में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कलेक्ट्रेट एवं तहसील स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाने, नगर क्षेत्र में वर्षाकाल से पूर्व नालों की समुचित सफाई कराने, तथा चिरईगांव विकासखंड के कटान प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई विभाग द्वारा पूर्व से ही निरोधात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इसके अतिरिक्त, बाढ़ राहत शिविरों हेतु विभागवार समन्वित ड्यूटी चार्ट तैयार करने, पेयजल एवं प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, नावों का चिन्हांकन करने, नाविकों एवं गोताखोरों का विवरण संकलित करने तथा राहत सामग्री (खाद्यान्न, आटा, चावल, दाल, गुड़, नमक, मोमबत्ती, माचिस, डीजल, जनरेटर, सोलर लाइट आदि) की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग को शिविरों में स्वास्थ्य कैम्प आयोजित कर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। इससे पूर्व अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) ने अवगत कराया कि तहसील सदर अंतर्गत वरुणा नदी से 36 वार्ड तथा गंगा नदी से 113 ग्राम प्रभावित होते हैं। इसी प्रकार तहसील पिंडरा के 21 ग्राम एवं तहसील राजा तालाब के 24 ग्राम आंशिक रूप से बाढ़ से प्रभावित होते हैं। बाढ़ की स्थिति से निपटने हेतु जिला प्रशासन के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस एवं पीएसी द्वारा समन्वित रूप से कार्य किया जाता है तथा आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त नावों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है। जनपद में बाढ़ के दौरान तहसील सदर में 37, तहसील पिंडरा में 03 तथा तहसील राजा तालाब में 06 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए जाते हैं। इन शिविरों में कम्युनिटी किचन के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की जाती है तथा बच्चों एवं वृद्धजनों हेतु दूध एवं फल (केला आदि) उपलब्ध कराया जाता है। प्रत्येक राहत शिविर में स्वास्थ्य, नगर निगम, पशुपालन सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाती है तथा राजस्व विभाग द्वारा प्रत्येक शिविर हेतु नोडल अधिकारी नामित किए जाते हैं।

अधिशासी अभियंता, बंधी प्रखंड द्वारा अवगत कराया गया कि सिंचाई विभाग की कुल 03 परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं। जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि जनपद में संचालित बाढ़ बचाव संबंधी समस्त परियोजनाओं को संभावित बाढ़ से पूर्व दिनांक 15 जून तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाए। कार्य में शिथिलता अथवा गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) डॉ. सदानंद गुप्ता, अधिशासी अभियंता बंधी प्रखंड, एनडीआरएफ के प्रतिनिधि, तथा स्वास्थ्य, पशुपालन, पूर्ति, शिक्षा, विद्युत, पंचायत राज, खंड विकास अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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