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नमोघाट हत्या‌काण्ड में सुरक्षा एजेंसी के संचालक की जमानत अर्जी हुई खारिज

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वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट                वाराणसी –काशी के प्रसिद्ध नमो घाट पर घूमने को लेकर हुए विवाद में युवक राजेश जायसवाल उर्फ़ चिंटू की पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में वाराणसी की सत्र न्यायालय ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार शुक्ला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी अनुज सिंह की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अनुज सिंह बाबा विश्वनाथ प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी का संचालक है। अदालत में अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान, वादी के अधिवक्ता राजेंद्र प्रताप सिंह, विनय जायसवाल, दीपदर्शन प्रसाद व सरिता जायसवाल ने अपना पक्ष रखा। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बीती 24 मई 2026 को वादी बद्रीनारायण जायसवाल का 18 वर्षीय पुत्र राजेश जायसवाल अपने दोस्तों के साथ दोपहर करीब 3:30 बजे नमो घाट पर घूमने आया था। घाट पर तैनात गार्डों ने उन्हें जाने से रोका। इसके बाद दोनों पक्षों में कहा सुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर गार्ड ने अपने अन्य साथियों को बुला लिया, जो लाठी डण्डा,राड और बेल्ट से लैश होकर आए और युवकों पर जानलेवा हमला कर दिया। इस मारपीट के दौरान राजेश गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। जिसकी कबीरचौरा अस्पताल में चल रहे इलाज के दौरान डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना में उसके दोस्तों को भी काफी चोटें आई। पोस्टमार्टम में नौ चोटें आयीं। विवेचना के दौरान कराये गये पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर चेहरे, कंधे, छाती और पीठ समेत कुल नौ गंभीर चोटे पाई गई। डॉक्टर की राय के अनुसार राजेश की मौत छाती के बायीं ओर किसी भारी वस्तु से किए गए प्रहार के कारण लगे शाक की वजह से हुई थी।

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