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नारी अधिकारों का संदेश लेकर निकली स्कूटी रैली, जन-जागरूकता का बना माध्यम

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पूजा भारद्वाज की रिपोर्ट

वाराणसी। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम–प्रचार अभियान” के तहत आयोजित स्कूटी रैली ने नारी अधिकारों और सशक्तिकरण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। रैली को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

नारी सशक्तिकरण का संदेश

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के शाश्वत आदर्श का पुनर्स्थापन है, जिसमें नारी को ‘शक्ति’, ‘सृजन’ और ‘संस्कार’ का मूल स्रोत माना गया है।”

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह अधिनियम महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाकर लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बना रहा है।

कुलपति ने बताया कि स्कूटी रैली का मुख्य उद्देश्य नारी सम्मान, समानता और सुरक्षा के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना है। रैली विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से शुरू होकर राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट होते हुए पुनः परिसर में समाप्त हुई।

*महिलाओं को मिला प्रेरणा संदेश*

मुख्य अतिथि श्रीमती सोनिया जैन ने कहा कि इस तरह की रैलियाँ समाज में सकारात्मक सोच विकसित करती हैं और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती हैं। उन्होंने कहा कि जब नारी शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती है, तभी सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।

बड़ी संख्या में सहभागिता*

कार्यक्रम में प्रो. जितेन्द्र कुमार, डॉ. नीलम गुप्ता, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा सहित कई गणमान्य लोग और छात्राएं महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

जागरूकता का प्रभावी प्रयास*

यह आयोजन नारी सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रेरणादायी  प्रयास साबित हुआ।

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