सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। अलविदा जुमा (रमज़ान का आखिरी शुक्रवार) संपन्न होने के साथ ही पवित्र महीने के समापन और ईद-उल-फितर के आगमन की शुरुआत हो गई है। 29वें या 30 वें रोज़े के बाद चांद देखे जाने पर ईद मनाई जाएगी। उक्त जानकारी मोहम्मद नसीर अहमद ने बताई। उन्होंने बताया कि आसपास की बाजार में खरीदारी तेज हो गई है। और प्रशासन द्वारा शांतिपूर्ण नमाज के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। मोहम्मद नसीर अहमद मंसूरी ने कहा कि अलविदा जुमा और ईद-उल-फितर से संबंधित मुख्य बिंदु अलविदा जुमा का महत्व मुसलमानों के लिए बहुत बड़ी है। यह रमज़ान के विदाई और ईद की तैयारियों की दस्तक है। इस दिन मस्जिदों में भारी भीड़ होती है।और विशेष नमाज अदा की जाती है। ईद-उल-फितर का चांद दिखने पर निर्भर करती है। अगर 29 वां रोजा की चांद दिखता है। तो अगले दिन ईद होगी। इसलिए मुस्लिम घरों की महिलाएं, पुरुष, युवाओं, युवतियां बाज़ारों में पहुंचकर सेवइयां, कपड़े, और तोहफों की खरीदारी करते देखी जा सकती है। जिसके चलते बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। मंसूरी ने कहा कि ईद-उल-फितर पूरे महीने के रोजे और इबादत के बाद भाईचारे और खुशी के साथ मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि ईद की सही तारीख स्थानीय उलेमा और चांद के दीदार पर ही निर्भर करती है।