सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। मुसलमानों के लिए माह ए रमजान का पाक महीना आध्यात्मिक शुद्धि, आत्म-संयम (रोजा) कुरान की तिलावत और दान (जकात) का समय है। यह 9 वां इस्लामी महीना है। जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखकर अल्लाह की इबादत की जाती है। उक्त जानकारी अमन शांति एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार अहमद खान वारसी ने बताया कि यह महीना कुरान के अवतरण का प्रतीक है। और भाईचारे व सहानुभूति को बढ़ावा देता है। जिसका समापन ईद-उल-फितर के साथ होता है। उन्होंने माह ए रमजान का विशेष महत्व बताया कि आत्म-अनुशासन और शुद्धि: रोजा सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं है। बल्कि अपनी जुबान, व्यवहार और विचारों पर नियंत्रण रखना है। यह कुरान का महीना है। माना जाता है। कि इसी महीने में कुरान शरीफ नाजिल (प्रकट) हुआ था। इसलिए इसमें कुरान पढ़ने पर जोर दिया जाता है। गरीबों से सहानुभूति रखना और दान करना है। खान ने कहा कि भूखे रहकर गरीबों की भूख का एहसास होना है। जिसके चलते लोगों में सहानुभूति बढ़ती है। इस महीने में जकात (दान) देना बहुत पुण्य का काम माना गया है।
अल्लाह से नजदीकी का अहम रास्ता है। लोग रात में विशेष प्रार्थना (तरावीह) करते हैं। और इबादत में ज्यादा समय बिताते हैं। माह ए रमजान का महीना इंसान को नेक काम करने और बुरी आदतों से दूर रहने की सीख देता है, जिससे मन और आत्मा को सुकून मिलता है।