रवि शंकर राय की रिपोर्ट
लखनऊ* : उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं (Ola, Uber, Rapido आदि) का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए योगी सरकार ने आज एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है। कैबिनेट ने नई एग्रीगेटर पॉलिसी 2026 को हरी झंडी दे दी है।
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन* : अब किसी भी एग्रीगेटर कंपनी को उत्तर प्रदेश में अपनी सेवाएं देने के लिए राज्य सरकार के पास अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा और लाइसेंस लेना होगा।ड्राइवर का वेरिफिकेशन* : सभी कैब और बाइक टैक्सी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। बिना जांच के कोई भी ड्राइवर ऐप पर सक्रिय नहीं हो पाएगा।किराया नियंत्रण (Fare Control)* : सरकार अब इन कंपनियों के मनमाने किराए पर लगाम लगाएगी। पीक ऑवर्स के नाम पर वसूले जाने वाले भारी किराए (Surge Pricing) को नियंत्रित करने के लिए अधिकतम सीमा तय की जाएगी।
सुरक्षा फीचर्स:* सभी वाहनों में पैनिक बटन और GPS ट्रैकिंग होना अनिवार्य होगा, जिसे सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ा जा सकेगा।
*शिकायत निवारण* : कंपनियों को एक प्रभावी ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal) बनानी होगी, ताकि यात्रियों की समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके।
क्यों लिया गया यह फैसला
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक इन ऐप-आधारित सेवाओं पर सरकार का सीधा नियंत्रण कम था। केंद्र सरकार की ‘मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन्स 2025’ के आधार पर उत्तर प्रदेश ने अपने नियम तैयार किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और यात्रियों को लूट-खसोट से बचाना है।
ड्राइवरों को भी मिलेगा फायदा:
नए नियमों में ड्राइवरों के कल्याण का भी ध्यान रखा गया है। कंपनियों को अपने ड्राइवरों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस (₹5 लाख) और टर्म इंश्योरेंस (₹10 लाख) देना अनिवार्य हो सकता है। साथ ही, राइड कैंसिल होने पर लगने वाली पेनल्टी के नियम भी अब दोनों पक्षों (ड्राइवर और यात्री) के लिए समान होंगे।
> नोट: ये नियम अगले कुछ हफ्तों में पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दिए जाएंगे। जो कंपनियां इन नियमों का उल्लंघन करेंगी, उन पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।