सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। रमजान की आमद के साथ ही कस्बा बाजार के बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। बुधवार की देर शाम चांद देखने के बाद मुस्लिम बंधु तरावीह की नमाज अदा की और सहरी और इफ्तारी के लिए खरीदारी की। रमजान के आगाज पर मस्जिदों से गूंजेगी इबादत की सदाए और सदर महाल बाजार यानि पुरानी सट्टी बाजार सहित रेलवे स्टेशन बाजारों में छाई रौनक। चांद देखने के बाद माह ए रमजान के पवित्र माह का आगाज हो चुका है। इसके बाद कस्बा बाजार सहित शाही जामा मस्जिद, नूरी मस्जिद लोदीपुर, चार मीनार मस्जिद पठान टोली, बुंदेली खान मस्जिद, चौधरी महाल मस्जिद, सरदार खान की मस्जिद के अलावा मस्जिदों में पहली तरावीह की नमाज अदा की गई। रमजान के आगाज के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। बताया जा रहा है। की 19 फरवरी को पहले रोजे की शुरुआत होगी। इस दौरान रोजेदार सुर्योदय से सूर्यास्त तक अन्न जल त्याग कर रोजा रहे। जिसके साथ ही रमजान शरीफ का पहला अशरा ‘रहमत’ का शुरु हो गया। 19 फरवरी को पहले रोजा के साथ पवित्र माह की शुरुआत हो गई है। एक महीने बाद खुशियों का त्योहार ईद परंपरा के अनुसार मनाया जाएगा। रमजान का पहला रोजा सबसे छोटा और अंतिम रोजा सबसे बड़ा होगा। मुकद्दश महीना माह ए रमजान को लेकर लोगों में काफी उत्साह रहा। बाजार में रौनक बढ़ गई। मुस्लिम इलाको सहित बाजार और मस्जिदों में छाई रौनक रमजान की आमद से मालूम इलाको में रौनक छा गई। मुस्लिम समाज में खुशियां फैल गई। सभी लोग अल्लाह की इबादत में जुटने कि तैयारी कर ली इसके साथ ही अपने गुनाहों की माफी मांगेगे। बुधवार को चांद देखने के साथ ही तरावीह नमाज भी शुरु हो गई। पुरुषों ने मस्जिद में तरावीह की नमाज अदा की जबकि महिलाओं ने घरों में तरावीह की नमाज पढ़ी। बताया जाता है। की नमाज, कुरआन-ए-पाक की तिलावत, तस्बीह और दुआ का सिलसिला जारी हुआ। जो लगातार एक माह तक जारी रहेगा। लोग अल्लाह के हम्द ओ सना की और इबादत में जुट गए हैं। सहरी- इफ्तारी की खास तैयारी इससे पहले देर रात तरावीह की नमाज खत्म होने के बाद लोग गुरुवार से शुरु होने वाले रोजे की सहरी और इफ्तार की तैयारियों में जुट गए। चांद दिखने के बाद सहरी की तैयारी ने बाजारों की रौनक बढ़ा दी है। पुरानी सट्टी बाजार उर्फ सदर महाल, कस्बा बाजार, पालिका मोड़ सहित रेलवे स्टेशन बाजार जैसे इलाकों में सहरी और इफ्तार के सामानों के लिए पहले से सजी दुकानों पर भीड़ देखने को मिली। रमजान की आमद पर मोहल्ले के लोगों में काफी उत्साह से लबरेज दिखे। कहीं सेवईयां खरीदी जा रही थीं। तो कहीं खजूर.सेवईयों और खजूर की क्वॉलिटी को लेकर लोग संजीदा दिखे। यह रौनक पूरे एक माह तक बरकरार रहेगी। गुरुवार से रमजान में सहरी और इफ्तार के दस्तख्वान पर सजे लजीज पकवान, शर्बत, फल, खजूर वगैरा रोजेदार का इस्तकबाल करते नजर आएं। रोजा न रखना बहुत बड़ा गुनाह। शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने बताया कि इस्लाम धर्म के सबसे पाक माह रमजान की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होती है। उन्होंने बताया कि रमजान शरीफ का महीना दीन-ए-इस्लाम में खास अहमियत रखता है। इस माह में इस्लाम धर्म के मानने वाले पूरा महीना रोजा रखते हैं। और अल्लाह की इबादत करते हैं। नूरी मस्जिद लोदीपुर के इमाम असरफ करीम कादरी ने कहा कि इस पाक महीने मे रोजा रखने वाले रोजेदार सुबह सादिक से पहले तक सहरी करके रोजे की नीयत करके रोजा रखने की शुरुआत करते हैं। शाम को सूरज छिपने के बाद इफ्तार करते हैं। रोजा न रखना बहुत बड़ा गुनाह है। रोजा का इंकार करने वाला इस्लाम धर्म से खारिज है। उन्होंने कहा कि रमजान के रोजे फर्ज हैं। और रमजान रहमत- बरकत का महीना है। कादरी ने बताया कि इस्लाम धर्म में माह-ए-रमजान बेहद खास है। हर बालिग मुसलमान मर्द, औरत जो अक्ल वाला और तंदुरुस्त हो उस पर रमजान के रोजे रखना फर्ज है। जो मुसलमान रोजा नहीं रखता है। वह अल्लाह की रहमत से महरूम रहता है। रोजा न रखने पर वह शख्स अल्लाह की नाफरमानी करता है। आगे बताया कि रमजान बहुत ही रहमत और बरकत वाला महीना है। अल्लाह के बंदे दिन में रोजा रखते हैं। और रात में खास नमाज तरावीह पढ़ते हैं। इस माह में मुसलमान कसरत से जकात, सदका, फितरा (एक प्रकार का दान) निकाल कर गरीब, यतीम, बेसहारा, बेवाओं की मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि रोजे की हालात में किसी की बुराई करने और सुनने, बुरा देखने, बुरा करने से बचना चाहिए।