वशिष्ठ कुमार की रिपोर्ट
वाराणसी। मध्यप्रदेश के रीवा में आर्यिकाओं के साथ घटी हृदयविदारक एवं अमानवीय घटना ने संपूर्ण जैन समाज सहित देशभर के धर्मप्रेमी नागरिकों को गहरे आघात में डाल दिया है। त्याग, तपस्या, अहिंसा और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने वाले साधु-संतों की सुरक्षा आज एक गंभीर राष्ट्रीय विषय बन चुकी है। इस घटना के विरोध एवं संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर देशव्यापी स्तर पर “साधु-संत सुरक्षा अभियान” चलाया जा रहा है।
राष्ट्रीय संत परम पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज के आह्वान पर दिनांक 25 मई 2026, सोमवार को प्रातः 8:00 बजे वाराणसी सहित देशभर में शांतिपूर्ण मौन रैली का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं मध्यप्रदेश शासन को ज्ञापन प्रेषित कर “राष्ट्रीय संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” तत्काल लागू करने की मांग की जाएगी।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह रैली पूर्णतः अहिंसक, अनुशासित एवं कानून के दायरे में आयोजित की जाएगी। समाज के सभी वर्गों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता की अपील की गई है, ताकि संत समाज की सुरक्षा के प्रति सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से पांच महत्वपूर्ण मांगें रखी जाएंगी। पहली मांग के तहत साधु-संतों के विहार मार्ग की पूर्व सूचना पर अनिवार्य पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। दूसरी मांग में प्रत्येक जिले में “संत सुरक्षा प्रकोष्ठ” के गठन की आवश्यकता बताई गई है। तीसरी मांग के अनुसार आर्यिका संघ एवं माताजी के विहार के दौरान महिला पुलिस बल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। चौथी मांग में संतों पर हमला करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए इसे गैर-जमानती अपराध घोषित करने की मांग रखी गई है। वहीं पांचवीं एवं प्रमुख मांग के रूप में “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाकर उसे संसद में पारित करने का आग्रह किया जाएगा।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने अपने संदेश में कहा है कि “इस बार प्रतिक्रिया नहीं, परिणाम चाहिए।” इसी भावना के साथ यह आंदोलन समाज में जागरूकता एवं सुरक्षा का संदेश देने का कार्य करेगा।
रैली के दौरान श्रद्धालु एवं समाजजन विभिन्न नारों के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त करेंगे, जिनमें प्रमुख हैं — “संत बचे तो संस्कृति बचेगी”, “अहिंसा के रक्षक की रक्षा करो”, “संत सुरक्षा = राष्ट्र सुरक्षा” तथा “प्रतिक्रिया नहीं, परिणाम चाहिए।”
समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं मीडिया बंधुओं से आग्रह किया गया है कि वे इस पुण्य एवं सामाजिक कार्य में सहभागी बनकर अहिंसा के पथिकों की सुरक्षा हेतु अपनी आवाज बुलंद करें।