विरसा मुंडा के स्मृति दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि, युवाओं को धरती आबा की विचारधारा अपनाने का आह्वान

शिवपूजन कुमार की रिपोर्ट

मऊ 9 जून 2026: आज विरसा मुंडा के 126 वें स्मृति दिवस पर आदिवासी कांग्रेस जनपद मऊ और भारतीय गणतंत्र रक्षक संच द्वारा कैंप कार्यालय बारा, मऊ में उनकी वीरता, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद किया गया। उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ और आदिवासी कांग्रेस की जिला ईकाई द्वारा धरती आबा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई । 

आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र गोंड ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि विरसा मुंडा मात्र 25 वर्ष की आयु में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ ‘उलगुलान’ (महान विद्रोह) का नेतृत्व कर आदिवासी गौरव और भूमि अधिकार की लड़ाई के प्रतीक बन गए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज के युवा विरसा के साहस, अपनी जड़ों से जुड़ाव और एकता के संदेश को अपनाकर देश की प्रगति में योगदान दें।वक्ता ने कहा, “विरसा मुंडा हमें याद दिलाते हैं कि सही मुद्दे पर खड़े होने के लिए उम्र या संसाधन नहीं, जज्बा जरूरी है। अपनी संस्कृति, पर्यावरण और भूमि अधिकार की रक्षा के लिए हमें एकजुट होकर लड़ना होगा।”

कार्यक्रम में विरसा मुंडा की शिक्षाओं पर आधारित ‘जय जोहार’ अभियान की घोषणा की गई, जिसमें आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और युवा सशक्तिकरण पर जोर दिया जाएगा।

सभा में एडो. बिमल प्रताप गोंड, विवेक कुमार, विप्लव चद्र, प्रथम कूमार, रामजीत गोंड ,वीरेंद्र गोंड , इंद्रासन गोंड, बाली गोंड ,अजंता गोंड ,मनोहर गोंड , अजय भारद्वाज, राहुल पाल, आदित्या प्रजापति , पप्पू गोंड, रजनीश गोंड, ओमराज गोंड, कौशिक गोंड, अमरजीत कन्नौजिया, संध्या देवी, रीता देवी, मंधा देवी,इंदु देवी,रुक्मणि देवी,सुनीता देवी, प्रिया कुमारी, निशा गोंड आदि लोगों ने भाग लिया और विरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

विरसा मुंडा आदिवासी समाज के महानायक ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत के स्वाभिमान और न्याय के प्रतीक हैं।

उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है — *अपनी धरती के पुत्र बनो, अन्याय के सामने कभी सिर मत झुको।*

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. उमेश चन्द्र, और संचालन विवेक कुमार जी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एडो. बिमल प्रताप गोंड जी ने किया।

जय जोहार!

जय धरती आबा!

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