दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्टवाराणसी –समाज में बढ़ती हुई नफरत और हिंसात्मक प्रवृत्तियों का एक ताजा उदाहरण जनकवि धूमिल के गांव खेवली को जाने वाली सड़क पर विट्ठलपुर रेवती के निकट स्थापित धूमिल की प्रतिमा का कतिपय,असामाजिक एवं अराजक शरारती तत्वों द्वारा 27 जुलाई की रात में तोड़ा जाना है। प्रगतिशील लेखक संघ वाराणसी इकाई के पदाधिकारियों द्वारा इस शर्मनाक और कायराना कार्य की घोर निन्दा किया है। निश्चित रूप से धूमिल की कविता अपने समय में और आज भी आम जनता के जीवन को अमानवीय तथा बदतर बनाने वाली ताकतों के खिलाफ एक चुनौती पूर्ण आवाज है। उनकी कविता ने 60 के बाद की हिंदी कविता में युगांतर उपस्थित किया है और सामंतवादी सत्ताधारी शक्तियों का पुरजोर विरोध किया है। आज धूमिल आम भारतीय जनता की आवाज बन चुके हैं। प्रगतिशील लेखक संघ वाराणसी इकाई के पदाधिकारियों द्वारा जिला प्रशासन से इस तरह का अपराधिक कार्य करने वालों को चिन्हित कर कठोर सजा देते हुए की जन कवि धूमिल की टूटी हुई प्रतिमा का पुनर्निर्माण कराने की मांग किया गया है।