अमित श्रीवास्तव की रिपोर्ट
वाराणसी। काशी की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासतों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले श्री जगन्नाथ मंदिर, अस्सी के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण कार्य में कथित रूप से अवैध कब्जाधारकों और असामाजिक तत्वों द्वारा बाधा उत्पन्न किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी, अस्सी, वाराणसी के संरक्षक ट्रस्टी एवं पंडित बेनी प्रसाद शापुरी के वैधानिक वारिस दीपक शापुरी ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
दीपक शापुरी ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर अस्सी क्षेत्र की एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर है, जिसका निर्माण लगभग वर्ष 1780 से 1790 के बीच उनके पूर्वज परम श्रद्धेय पंडित बेनी राम जी एवं विशंभर पंडित जी द्वारा कराया गया था। पिछले दो सौ वर्षों से अधिक समय से शापुरी परिवार मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा-अर्चना तथा विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के संरक्षण और संचालन का दायित्व निभाता आ रहा है।
उन्होंने बताया कि मंदिर के पारदर्शी एवं व्यवस्थित संचालन के लिए वर्ष 1989 में माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में एक सार्वजनिक ट्रस्ट का गठन किया गया था। वर्तमान में मंदिर परिसर के संरक्षण, जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण का कार्य ट्रस्ट की सर्वसम्मति से गठित समिति के माध्यम से कराया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष बृजेश सिंह तथा सचिव शैलेश त्रिपाठी हैं। यह कार्य मंदिर की प्राचीनता, धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक महत्व को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
दीपक शापुरी के अनुसार, मंदिर परिसर में कुछ ऐसे लोग निवास कर रहे हैं जिनका मंदिर प्रशासन या ट्रस्ट से कोई वैधानिक संबंध नहीं है। आरोप है कि ये लोग मंदिर परिसर पर अवैध कब्जा बनाए रखने के उद्देश्य से जीर्णोद्धार कार्य में लगातार व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अतीत में मंदिर की देखरेख के लिए नियुक्त कर्मचारी स्वर्गीय सकल नारायण सिंह पर भी मंदिर परिसर में अवैध कब्जे स्थापित कराने तथा अवैध वसूली करने के आरोप लगे थे। इस संबंध में वर्षों तक न्यायालय में विवाद चला, जिसके बाद माननीय उच्च न्यायालय द्वारा ट्रस्ट के पक्ष में निर्णय दिए जाने पर उन्हें परिसर से बेदखल किया गया।
इसके बाद नियुक्त पुजारी श्रीराम शर्मा पर भी मंदिर परिसर पर अवैध अधिकार स्थापित करने का प्रयास करने का आरोप लगा। प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें उनके पद से हटाकर परिसर से बाहर किया गया। वर्तमान में उनके दो भाइयों पर मंदिर परिसर में अवैध रूप से निवास करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने पूज्य तेजोनिधि ब्रह्मचारी जी की समाधि स्थल पर कब्जा कर रखा है, जबकि दूसरे व्यक्ति ने मंदिर परिसर के पवित्र क्षेत्र में निजी रसोई संचालित कर रखी है, जिससे मंदिर की धार्मिक मर्यादा प्रभावित हो रही है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति स्वयं को मंदिर का पुजारी, सेवायत अथवा अधिकृत प्रतिनिधि बताकर श्रद्धालुओं के बीच भ्रम फैलाते हैं, जबकि उनकी नियुक्ति और सेवा समाप्ति की प्रक्रिया ट्रस्ट द्वारा विधिवत पूरी की जा चुकी है। उनके पास किसी प्रकार का वैध नियुक्ति पत्र अथवा अधिकार पत्र उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में मंदिर के अधिकृत पुजारी राधेश्याम जी हैं, लेकिन इसके बावजूद कथित अवैध कब्जाधारक जीर्णोद्धार कार्य को बाधित करने, श्रमिकों को डराने तथा धार्मिक वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
दीपक शापुरी का कहना है कि मंदिर परिसर में रहने वाले अधिकांश लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज या नियुक्ति पत्र नहीं है। आरोप है कि इन्हें पूर्व में मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ व्यक्तियों द्वारा बसाया गया था और अब ये लोग मंदिर की भूमि पर स्थायी कब्जा स्थापित करने की मंशा रखते हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर में रह रहे व्यक्तियों की जांच कर उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत बेदखल किया जाए, जीर्णोद्धार कार्य में बाधा पहुंचाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए तथा मंदिर परिसर में पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर मंदिर की धार्मिक मर्यादा, सुरक्षा और वैधानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन जनभावनाओं, धार्मिक आस्था तथा वाराणसी की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस मामले में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करेगा, जिससे श्री जगन्नाथ मंदिर के संरक्षण एवं विकास कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकें।