कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट वाराणसी दिनांक 2-9-2005 को सपा शासन काल में जुमे की नमाज पढ़ने जाते समय मौलाना बातिन की जाँच को लेकर मामूली कहासुनी धीरे धीरे एक भयंकर बवाल और दंगे का रूप ले लिया था जिसमें काफी सरकारी क्षति के साथ साथ जबर्दस्त बवाल हुआ था और सपा शासन में उन्हीं के गुंडे इस बवाल को अंजाम दिए थे लेकिन जब अराजकता हद से ज्यादा बढ़ गई थी तो अपनी इज्जत बचाने के लिए बेगुनाह मुस्लिम व्यापारियों एवं भाजपा नेताओं को नामजद करते हुए संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था जिसमें वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर गिरी गुलशन कपूर समेत कुल 7 हिंदुओं एवं 9 मुस्लिम व्यापारियों को फंसाया गया था जिसमें 21 वर्षों तक काफी लंबी बहस जिरह बयान के साथ राजनीत भी होती रही तत्कालीन केंद्र में काग्रेस सरकार एवं राज्य के सपा सरकार से मिलने कई बार मौलाना बातिन साहब के साथ कई प्रतिनिधि मंडल सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव तक से मिला सब ने उचित सहयोग एवं मुकदमा वापस करने का आश्वासन दिया था लेकिन उसके बाद दोनों सरकारों ने कुछ नहीं किया था इनकी मंशा को समझते हुए मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने नेताओं एवं सरकारों का भरोसा छोड़ कर वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी के माध्यम से मजबूती से मुकदमा लड़ा इनके साथ एड. गुलाम गौश खान, एड. आशिफ उमर के तर्कों से संतुष्ट होकर न्यायालय में सुखद अंजाम हुआ की MP MLA कोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री यजुवेंद्र विक्रम सिंह जी ने साक्ष्य व बयानों के परीक्षण से सभी को दोषमुक्त कर दिया