सुकन्या सिंह की रिपोर्ट
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में आयोजि वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के तृतीय दिवस पर खेलों का उत्साह अपने चरम पर रहा। इस अवसर पर वैदिक विद्वान एवं प्रतियोगिता संयोजक डॉ० सत्येन्द्र कुमार यादव ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कबड्डी, वालीबाल एवं शतरंज जैसे खेल शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने कहा कि कबड्डी से शरीर मजबूत होता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है तथा सहनशक्ति का विकास होता है। इसमें तीव्र गति, संतुलन एवं फुर्ती की आवश्यकता होती है, जिससे शरीर चुस्त-दुरुस्त बना रहता है। साथ ही यह खेल टीम भावना, साहस और आत्मविश्वास को भी सुदृढ़ करता है।वालीबाल के संबंध में उन्होंने बताया कि यह एक उत्कृष्ट टीम खेल है, जिससे हाथ-पैरों का समन्वय बेहतर होता है, कूदने एवं त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ती है तथा सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व कौशल का विकास होता है। नियमित अभ्यास से शरीर स्वस्थ रहता है और तनाव में भी कमी आती है
शतरंज को बौद्धिक खेल बताते हुए डॉ० यादव ने कहा कि इससे एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा तार्किक चिंतन क्षमता का विकास होता है।
महिला शतरंज में निधि गुप्ता का उत्कृष्ट प्रदर्शन
महिला शतरंज प्रतियोगिता में निधि गुप्ता ने शानदार एवं प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने पूरे प्रतियोगिता क्रम में असाधारण एकाग्रता, रणनीतिक कौशल एवं धैर्य का परिचय दिया। उनके खेल कौशल की उपस्थित आचार्यों एवं खिलाड़ियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
द्वितीय स्थान पर शर्मिष्ठा आर्या तथा तृतीय स्थान पर अर्चना मौर्य रहीं।
पुरुष शतरंज प्रतियोगिता में सनत कुमार प्रथम, शिवेंद्रधर द्विवेदी द्वितीय एवं अंकित मिश्रा तृतीय स्थान पर रहे।
समस्त प्रतियोगिताएँ खेल प्रशिक्षक आदित्य कुमार एवं सोमनाथ पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुईं।
कार्यक्रम में संस्कृत उद्घोषक के रूप में वेद विभाग के शोध छात्र यज्ञ नारायण ने प्रभावी संचालन किया। वेद वेदांग संकायाध्यक्ष प्रोफेसर महेन्द्र पाण्डेय मुख्य अतिथि रहे। प्रोफेसर विशाखा शुक्ला, प्रोफेसर रविशंकर पाण्डेय, डॉ० कुंज बिहारी द्विवेदी एवं डॉ० विजेन्द्र आर्य निर्णायक मंडल में सम्मिलित रहे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त आचार्यगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।