(वाराणसी विजय कुमार की रिपोर्ट)। महात्मा गौतम बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पर्यटन बढ़ने के साथ यहां ठहरने की सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ है। बड़े होटल और प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों के बीच अब सारनाथ की गलियों, चौराहों और रिहायशी इलाकों में कमरे लेकर होटल, पेइंग गेस्ट हाउस, होमस्टे और ‘स्टे’ के नाम पर ठहरने की व्यवस्था संचालित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इनमें कुछ ऐसे प्रतिष्ठान भी हैं, जिनके संचालन से संबंधित आवश्यक मानकों और अनुमतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब इन छोटे ठहराव स्थलों पर विदेशी नागरिकों के रुकने की बात सामने आती है। सूत्रों के मुताबिक विदेशी नागरिकों के ठहरने की स्थिति में आवश्यक सी–फॉर्म/फॉर्म III रिपोर्टिंग और एफआरआरओ संबंधी अनुपालन भी जांच के दायरे में आना चाहिए। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक आंकड़े अथवा पुष्टि सामने नहीं आई है।बड़ा सवाल यह है कि क्या सारनाथ में विदेशी नागरिकों को ठहराने वाले सभी होटल, पेइंग गेस्ट हाउस और स्टे की विभागीय स्तर पर नियमित जांच होती है। यदि होती है तो कितने प्रतिष्ठानों का सत्यापन किया गया और कितने नियमों के विपरीत पाए गए, इसका विवरण भी सामने आना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर किसी घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंचती है, जांच होती है और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होती है। सवाल यह है कि जब ठहरने वाले प्रतिष्ठानों की पहले से पहचान और निगरानी की व्यवस्था हो सकती है तो घटना का इंतजार क्यों किया जाए?
विदेशी नागरिकों से जुड़ा मामला होने पर छोटी सी लापरवाही भी सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। ऐसे में सारनाथ क्षेत्र में संचालित होटल, पेइंग गेस्ट हाउस, होमस्टे और स्टे की जमीनी जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, अतिथि पहचान रिकॉर्ड तथा विदेशी नागरिकों की सी फॉर्म रिपोर्टिंग की स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
प्रशासन और पर्यटन विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि सारनाथ में कुल कितने ठहराव स्थल पंजीकृत हैं और कितने बिना पंजीकरण अथवा आवश्यक मानकों के संचालित पाए गए हैं। स्थानीय एवं जानकार लोगों का आरोप है कि कहीं-कहीं यह कारोबार नियमों के विपरीत भी संचालित हो रहा है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि यदि कोई प्रतिष्ठान नियमों के विपरीत संचालित पाया जाता है तो उसे संरक्षण या सहयोग किस स्तर से मिल रहा है।सवाल कार्रवाई का नहीं, कार्रवाई के समय का है—घटना के बाद या घटना से पहले? अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही वाले सारनाथ में व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी अप्रिय घटना के बाद फाइलें न खुलें, बल्कि उससे पहले ही कमियों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।