सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। रोजेदार व हर बंदे को चाहिए की ज्यादा से ज्यादा कुरान की तिलावत करें और इबादत करें। रोजेदार की हर सांस इबादत, रोजे में बढ़ जाता है। इबादत का सवाब मुकद्दश महीना रमजानुल मुबारक निहायत बरकत व बाअजमत वाला महीना है। इस महीने में अल्लाह तआला रोजेदार के ऊपर बेशुमार ने अमतें नाजिल फरमाता है। रोजेदार एक दंपति मेहरून निशा, मोहम्मद शौकत अल्लाह की इबादत में मश्गूल हुए। उन्होंने बताया कि रोजेदार की फजीलतों के बारे में नबी-ए करीम की हदीश है कि रोजेदार के मुंह की महक अल्लाह के नजदीक मुश्क व अंबर से भी ज्यादा पसंदीदा और अफजल है। रोजे की हालत में हर सांस इबादत में शुमार होती है। इफ्तार के वक्त बंद-ए मोमिन जो कुछ भी रब की बारगाह में दुआएं करता है। तो अल्लाह उसे हर हाल में कबूल व मकबूल फरमाता है। अकीदतमंदों ने गुरुवार को रमजान महीने का पहला रोजा रखने के साथ ही रहमत वाले अशरे का पहला दिन भी पूरा कर लिया। इस अशरे अर्थात 10 दिनों में अल्लाह अपने बंदों पर बेशुमार रहते नाजिल करता है। मेहरून निशा, मोहम्मद शौकत ने बताया कि रोजेदार व हर बंदे को चाहिए की ज्यादा से ज्यादा कुरान की तिलावत करें और इबादत करें। इफ्तार के बाद नमाज-ए मगरिब व तरावीह की पुरुष लोग मस्जिदों में और महिलाएं नमाज अपने घरों में ही अदा कर रही है। और अल्लाह की बारगाह में मुल्क में अमनो सलामती की दुआएं मांगी। छोटी बड़ी खतरनाक बीमारी के खात्मे के लिए खुसूसी (खास कर) दुआ करना चाहिए। रमजान में अकीदतमंद मस्जिदों के साथ अपने घरों में भी कसरत के साथ इबादत करना चाहिए। रमजान का पवित्र माह चल रहा है। पूरे माह अकीदतमंद मस्जिदों व घरों में इबादत करते रहना चाहिए। हैं।