सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। रमजान माह में हजारों हजारों की संख्या में रोजेदार मस्जिदों में पहुंचकर नमाज अदा कर खुदा से देश में अमन-चैन व खुशहाली की दुआ मांगते है। और महिलाएं घरों में कुरान की तिलावत करती और नमाज पढ़ती है। इस दौरान रोजेदार मोहम्मद वसीम मंसूरी ने कहा कि माह ए रमजान बरकत का महीना होता है। उन्होंने कहा कि यदि इंसान ईमानदारी से रोजे रखे तो अल्लाह उसके पिछले गुनाहों को माफ कर देता है। और इंसान को बुराइयों से बचाता है। इंसान को झूठ बोलने तथा दूसरों के हक को मारने वाला बनने की बजाय नेक इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए। कुरान किताबे इलाही है। इसके पढ़ने से जीने का तरीका आता है। वसीम ने कहा कि रमजान बरकत, रहमत व मगफिरत का महीना है। किस्मत वालों को ही यह माह नसीब होता है। इस माह में खास इबादत रोजा रखना व तरावीह पढ़ना होता है। महिला रोजेदार सुल्ताना बानो ने कहा कि रोजे रखना का सवाब खुदा अल्लाह देता है। एक नेकी के बदले 70 गुना सवाब मिलता है। माह ए रमजान मुबारक का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। पहले रोजे से दस रोजे तक का रहमत का अशरा है। उन्होंने बताया कि इस असरे में अल्लाह अपने गुनाहगार बंदों पर बेहिसाब बख्शीश फरमाते हैं। इस अशरे में ज्यादा से ज्यादा मगफिरत की दुआ होती है। अधिकतर रोजेदार कुरान की तिलावत, दुरुद शरीफ और तस्वीह पढ़ने में समय गुजार रहते है।
सुल्ताना ने बताया कि माह ए रमजान माह में हजारों हजारों की संख्या रोजेदार नमाज अदा करने के बाद देश प्रदेश में अमन चैन व खुशहाली की दुआ अल्लाह ताला से मांगते है। माह ए रमजान मुबारक में रोजे हर मुसलमान पर फर्ज हैं। रोजा अल्लाह की एक अहम इबादत है। रोजे की शुरुआत हजरत आदम अलैहिस्स्लाम के जमाने से हुई है। और दुनिया के तमाम मुजाहिद में रोजे का तसव्वुर पाया जाता है। इसीलिए अल्लाह ने कुरान में फरमाया कि ए ईमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किए गए हैं। रमजान का पहला अशरा रहमत का और दूसरा मगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात का है।