वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता
वाराणसी — मां गंगा में मिलने वाली समस्त सहायक नदियां और नगरी क्षेत्र से निकलने वाले जल और मल के जितने स्रोत हैं, वे जब तक पूरी तरह से निर्मल नहीं हो जाते तब तक मां गंगा निर्मल नहीं हो सकती। औद्योगिकरण और विकृत आस्था का सर्वाधिक दुष्प्रभाव संपूर्ण विश्व में नदियों के निर्मलता एवं अविरलता पर पड़ा है। इसलिए ना केवल नदियों की अविरलता और निर्मलता बल्कि संपूर्ण जल स्रोतों, कुण्डों, तालाबों में सर्वकालिक रूप से निर्मल जल की उपलब्धता का भाव जब तक जन जन के मन में स्थाई रूप से समाविष्ट नहीं हो जाता, तब तक संपूर्ण रूप से भारत और विश्व की नदियों का जल क्षेत्रों की सुरक्षा सम्भव नहीं हो पायेगा। उक्त बातें समग्र गंगा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष ने स्थानीय बच्चा बाजार में स्थित एक पैलेस में आयोजित गंगा समग्र के बैठक में कही। इस बैठक में गंगा समग्र भाग के अंतर्गत आने वाले 13 जिलों में से 8 जिलों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर गंगा समग्र के प्रांत संयोजक दिवाकर द्विवेदी ने मां गंगा और उनकी सहायक नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए गंगा समग्र द्वारा सामाजिक जागरूकता, रचनात्मक और संगठन विस्तार के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए संवत्सर के प्रारम्भ से अंत तक वर्ष पर्यंत मनाए जाने वाले छ: उत्सवों क्रमशः निषादराज जयन्ती,जन जागरण माह, गंगा सेवा निधि, वृक्षारोपण, विश्व नदी दिवस, गंगा महोत्सव और प्रतिज्ञा दिवस के माध्यम से कार्य को गति देने के लिए कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा की नदियों की अविरलता , निर्मलता और जल संरक्षण के लिए कार्यकर्ताओं को अपने नित्य कार्यों के कार्यों के साथ इस कार्य को भी जोड़कर चलना पड़ेगा। इस बैठक का आयोजन गंगा समग्र के जिला संयोजक धर्मेंद्र पाण्डेय ने तथा संचालन गंगा समग्र संयोजन चंद्रप्रकाश ने किया। इस कार्यक्रम में काशी प्रांत के कोषाध्यक्ष रणजीत सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, कपिन्द्र नाथ तिवारी, उमेश चंद्र सिंह, एनके द्विवेदी, शशि प्रकाश मिश्रा, जयशंकर तिवारी, श्रवण कुमार मिश्रा, धर्मेंद्र पांडे, संदीप त्रिपाठी, विजय पाठक, शमशेर सिंह, राज नारायण पटेल, अमित उपाध्याय, आशुतोष चतुर्वेदी, बीपी सिंह, संजय सिंह सिसोदिया, रवि उपाध्याय, भानु भूषण पांडे, नागेंद्र प्रताप सिंह, मनोज पांडे, रेखा सिंह, संतोष पांडे, संदीप सिंह, दुर्गेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे।