साक्षी सिंह की रिपोर्ट
*वाराणसी।भिखारीपुर डिस्कॉम मुख्यालय में हुए भीषण अग्निकांड ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की आंतरिक कार्यप्रणाली की कलई खोलकर रख दी है।जहाँ एक ओर करोड़ों के उपकरण राख हो चुके हैं,वहीं दूसरी ओर विभाग की “अतिरिक्त प्रभार” वाली नीति अब फील्ड पर तैनात कर्मचारियों की जान पर भारी पड़ रही है।पिछले 48 घंटों से बिना रुके बिजली आपूर्ति बहाल करने में जुटे जूनियर इंजीनियर अभिषेक सिंह देर शाम उपकेंद्र पर ही अचेत होकर गिर पड़े।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार थकान और मानसिक दबाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी और वे पास ही खड़े एसडीओ सौरभ के ऊपर गिर गए।उन्हें तत्काल एपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।गौरतलब है कि जेई अभिषेक सिंह एक हाथ से दिव्यांग होने के बावजूद तीन महत्वपूर्ण उपकेंद्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे:पूर्ण प्रभार: अमरा खैरा उपकेंद्र।अतिरिक्त प्रभार: कादीपुर और मडुआडीह उपकेंद्र।इस घटना ने वाराणसी जोन के मुख्य अभियंता राकेश पांडेय की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।बिजली विभाग के गलियारों में चर्चा है कि आखिर क्या मजबूरी थी कि इतने संवेदनशील और बड़े उपकेंद्रों को ‘एडिशनल चार्ज’ के भरोसे चलाया जा रहा था।उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि रिक्त पदों पर प्रभारी जेई की तैनाती की जाए ताकि कार्यक्षमता प्रभावित न हो।आदेश के बावजूद पूर्णकालिक जेई की तैनाती न करना और एक ही व्यक्ति पर तीन-तीन केंद्रों का बोझ डालना,विभाग की बड़ी प्रशासनिक विफलता मानी जा रही है।भिखारीपुर में हुए धमाकों और करोड़ों के नुकसान के बाद अब विभाग के भीतर ‘डैमेज कंट्रोल’ की राजनीति शुरू हो गई है।डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक के शहर में न होने का फायदा उठाकर कुछ आला अधिकारी फाइलों को दुरुस्त करने में जुटे हैं।बड़ा सवाल यह है कि क्या पूर्वांचल डिस्कॉम अपने ‘खास मोहरों’ को बचाएगा या मुख्य अभियंता पर इस लापरवाही के लिए गाज गिरेगी।जिस तरह से एक दिव्यांग कर्मचारी को तीन केंद्रों के बोझ तले दबाया गया,उसने कर्मचारी संगठनों में भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।जनता के बीच यह सवाल गूँज रहा है कि अगर करोड़ों के उपकरण जलने और कर्मचारी के अस्पताल पहुँचने के बाद भी मुख्य अभियंता राकेश पांडेय पर कार्यवाही नहीं होती तो क्या यह माना जाए कि पूर्वांचल डिस्कॉम में नियम केवल कागजों तक सीमित हैं।