कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट
वाराणसी। भूगोल (ऑनर्स) के दिव्यांग छात्र अभिनव सिंह ने अपने विभाग की शिक्षिका एवं विभागाध्यक्ष पर मानसिक, शैक्षणिक तथा भावनात्मक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। छात्र का कहना है कि वह सत्र 2021-22 का बी.ए. (भूगोल ऑनर्स) का छात्र है तथा दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद लगातार शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है। इसके बावजूद उसे विगत तीन वर्षों से एक ही विषय में लगातार अनुत्तीर्ण किया जा रहा है, जबकि अन्य विषयों में वह सफल रहा है।
अभिनव सिंह का आरोप है कि संबंधित शिक्षिका द्वारा उन्हें बार-बार उनकी दिव्यांगता को लेकर अपमानित किया गया। छात्र के अनुसार उन्हें “दिव्यांग”, “पढ़ाई तुम्हारे बस की बात नहीं है” जैसे शब्द कहकर हतोत्साहित किया गया और यहां तक कहा गया कि वह उनके करियर को बर्बाद कर देंगी तथा उनके विषय में कभी पास नहीं होने देंगी। छात्र का दावा है कि इन टिप्पणियों से वह लंबे समय से मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति से गुजर रहा है।
छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विषय के सेशनल परीक्षा में, जिसमें कुल 30 अंक निर्धारित होते हैं, सभी आवश्यक असाइनमेंट और कार्य समय पर जमा करने के बावजूद उसे मात्र 3 अथवा शून्य अंक दिए गए। उसका कहना है कि यह मूल्यांकन निष्पक्ष नहीं था और जानबूझकर उसे शैक्षणिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
अभिनव सिंह के अनुसार, उसने इस मामले की शिकायत विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल त्रिपाठी से की थी। प्रारंभ में उन्हें सहायता और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में विभागाध्यक्ष का रवैया बदल गया। छात्र का आरोप है कि दोबारा मिलने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा फोन पर भी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। छात्र का कहना है कि उसके पास बातचीत की रिकॉर्डिंग सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर प्रस्तुत किया जा सकता है।
पीड़ित छात्र ने बताया कि वह विभागाध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक, दिव्यांग प्रकोष्ठ तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाकर परेशान हो चुका है। दिव्यांग होने के कारण उसके लिए बार-बार कार्यालयों में जाना अत्यंत कठिन और कष्टदायक है। उसने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने तथा उसे न्याय दिलाने की मांग की है।
छात्र ने कहा कि यदि समय रहते उसकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो उसकी मानसिक स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। उसने प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ मामले को देखते हुए शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने की अपील की है