प्रज्ञा मिश्रा की कलम से वाराणसी आपको बता दें कि वैसे मुझे तरस आता है उन महिलाओं पर जो अपने पति को जहर देकर मार देती हैं फिर बाथरूम में दफन कर देती हैं तो कभी नीले ड्रम की कहानी लिख देती हैं तो कभी हनीमून के बहाने पहाड़ से धक्का मार देती हैं कभी सोचा होता कि इसके बाद का हस्र क्या होगा तो ऐसे खौफनाक घटना को अंजाम नहीं देतीं । तरस इसलिए आता है कि ऐसी महिलाएं ना घर की होती हैं ना घाट की …मतलब साफ है कि पति साथ ना ही वो प्रेमी जिसके प्रेम में अंधी होकर महिलाएं कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाती हैं आखिर अंजाम क्या होता है ??
आप सब अंजाम से वाकिफ हैं बस इन महिलाओं को समझना है कि प्रेम वेम कुछ नहीं होता है बस दिमाग की गंदगी है क्या वह प्रेमी साथ देगा जिसके लिए महिलाएं अपने पति को मारती हैं या उनके दिमाग में यह बात नहीं आएगी कि कभी विचारों का मतभेद होने पर उनका भी यही अंजाम हो सकता है तो सोचिए कि आपके साथ उसके आजीवन साथ होने की क्या गारंटी है ।
मेरा मानना तो यह है कि शादी से पहले ही अपनी पसंद ना पसंद परिवार के सामने रखना उचित है न कि शादी के बाद दोनों परिवारों के खुशियों को दांव पर लगाना अपनी जिंदगी का सत्यानाश करना साथ ही उस पति की हत्या करना जो कि शिद्दत से रिश्तों को निभाता है । मैं यह नहीं कह रही कि सिर्फ महिलाएं ही गलत हैं वह पुरुष भी गलत है जो किसी भी शादीशुदा स्त्री के प्रेम में पड़कर इस घटना को अंजाम देने में सहयोग करता है ।
अभी भी वक्त है संभल जाओ अंधों