सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानियां। सौरभ साहित्य परिषद् बरुईन के तत्वावधान में सुंदर कवि गोष्ठी का आयोजन डॉ. सुरेश राय के निवास “आनंद भवन” पर शनिवार को किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ वरिष्ठ कवि कामेश्वर द्विवेदी ने अपने मधुर भाव लहरियों द्वारा सरस्वती वंदना से किया। भाव भाषा एवं प्रस्तुति के अनुसार यह एक उम्दा रचना थी मानो मां सरस्वती स्वयं उपस्थित हो उठी हों। पेशे से इंजीनियर सुहृद कवि हरिशंकर पाण्डेय ने जीवन में पिता की भूमिका को रेखांकित करती खूबसूरत भोजपुरी कविता बाबूजी कड करजा कबो ना भराई, उनकर वजह से सभे काटता मलाई। ने खूब बाहबाही बटोरी। कोलकाता के सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार राम पुकार सिंह उर्फ पुकार गाज़ीपुरी ने वंदेमातरम पर आधारित अपनी ग़ज़ल “देश भक्तों के गले का हार वंदे मातरम् /बंकिम-ए-दिल का हसीं उदगार वंदे मातरम्। सुनाकर इस पर राजनीति करने वाले नेताओं को धतकार लगाते हुए राजनीति की रोटियां सेंकने वाले को जबरजस्त फटकार लगाई। इसी क्रम में प्रबंध काव्यकार कामेश्वर द्विवेदी जी ने जिस गीत में न रंच राष्ट्रप्रेम की झलक, / वह गीत कभी न अमर रह पाता है। सुनाकर काव्य गोष्ठी को नई ऊँचाई दी। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सौरभ साहित्य परिषद् बरुईन के संस्थापक एवं वरिष्ठ कवि राजेंद्र सिंह ने मन की बात की जगह जन की बात करने की वकालत करते हुए। कविता को जीवन के लिए संजीवनी बताया। उन्होंने समाज के जागरूक लोगों से नागरिक कर्तव्य को बखूबी निभाने की अपील के साथ कवियों से अपनी कविता कर्म ही है फल यहाँ बस कर्म की चिंता करो हर कदम मंजिल समझ निज-धर्म की चिंता करो” के माध्यम से उचित उपदेश को रेखांकित करने की ओर संकेत किया। कवियों ने बारी बारी से समाज हित पर अपने चोखे चौपदे प्रस्तुत कर लोगों को खूब गुदगुदाया। कवि गोष्ठी का सफल संचालन हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री ने एवं आभार कवि गोष्ठी के संयोजक डॉ. सुरेश राय ने किया।