Follow us on

एलजीबीटी (LGBT) समुदाय के लोगों और जनसामान्य के लिए एचआईवी/एड्स जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

Share this post:

वशिष्ठ कुमार की रिपोर्ट

वाराणसी स्थित माता आनंदमयी अस्पताल में आज 07/05/2026 को प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के तत्वाधान में एलजीबीटी (LGBT) समुदाय के लोगों द्वारा एचआईवी/एड्स जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस स्वास्थ्य शिविर का उद्देश्य हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पंहुचाने के साथ ही विशेषकर शुगर, टी.बी., यौन संचारित रोगों (STDs) और एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और आवश्यक चिकित्सकीय जांच शामिल रही। साथ ही जरूरतमंद लोगों के बीच निःशुल्क दवाओं का वितरण भी किया गया।

LGBT अधिकारों के लिए जागरूकता पर काम कर रहे सैम ने बताया कि सुरक्षित यौन व्यवहार, नियमित जांच, कंडोम के उपयोग और समय पर उपचार से हम स्वस्थ रह सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एचआईवी अब एक प्रबंधनीय (manageable) स्थिति है, यदि समय पर पहचान और इलाज किया जाए।

प्रिज्मैटिक फाउंडेशन से नीति ने शिविर में पंहुचे लोगों के बीच यौन स्वास्थ्य विषयक चर्चा की। विशेषकर LGBT समुदाय के युवाओं के बीच यौन संबंधो में आवश्यक सुरक्षा और जाँच इत्यादि के विषय में जानकारी दी।

उन्होंने शिविर में आए लोगो को सम्बोधित करते हुए बताया कि भारत में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के अनुसार:

देश में लगभग 23–24 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं।

वार्षिक अनुपात देखें तो संक्रमण के मामलों में कमी आ रही है। ध्यान देने का विषय है कि एलजीबीटी समुदाय, सेक्स वर्कर्स और इंजेक्शन ड्रग यूज़र्स—में संक्रमण की दर अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है।

अन्य यौन संचारित रोग (जैसे सिफिलिस, गोनोरिया, क्लैमाइडिया) के मामले भी भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक महत्वपूर्ण चुनौती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता की कमी, सामाजिक कलंक (stigma) और नियमित जांच न कराना इसके प्रमुख कारण हैं।

शिविर में उपस्थित अपोलो संस्था से सविता जी ने एचआईवी/एड्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने संक्रमण के कारण, रोकथाम के उपाय, सुरक्षित व्यवहार, नियमित जांच की आवश्यकता तथा समय पर इलाज के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही प्रतिभागियों की व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं पर परामर्श भी प्रदान किया गया।

प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के हेतवी ने बताया कि एलजीबीटी समुदाय अक्सर सामाजिक भेदभाव के कारण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाता है, ऐसे में इस प्रकार के शिविर बेहद महत्वपूर्ण हैं।

माता आनंदमयी अस्पताल के प्रशासक श्री देवाशीष दास ने बताया कि उत्तर प्रदेश, जो जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है, में एचआईवी का प्रसार राष्ट्रीय औसत के आसपास या उससे थोड़ा कम आंका गया है, लेकिन कुल मामलों की संख्या जनसंख्या के कारण बड़ी है।

उपलब्ध सरकारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुमानों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 1.5–2 लाख के बीच लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं।

वाराणसी जैसे बड़े शहरी-धार्मिक केंद्रों में पर्यटन , प्रवासी आबादी, असंगठित श्रम और जागरूकता की कमी के कारण STD और HIV की चुनौती बनी रहती है।

स्थानीय स्तर पर सटीक सार्वजनिक डेटा सीमित है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और ART केंद्रों के अनुसार नियमित जांच और परामर्श सेवाओं की मांग बढ़ रही है, जो जागरूकता में वृद्धि का संकेत है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया और इस पहल की सराहना की। प्रतिभागियों ने इस तरह के और अधिक जागरूकता एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।

अंत में आयोजकों ने भविष्य में भी इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग तक स्वास्थ्य और जागरूकता की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

सभी का धन्यवाद ज्ञापन अनामिका ने किया ।

शिविर में मुख्य रूप से रूमान, श्रेया, अनुराग, आर्या, तानिया, कार्तिक, दक्ष, एलेक्स, चंदन, नैंसी, सुमन , साहिल, तैन आदि शामिल रहे।

लेखक के बारे में

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

मौसम अपडेट

राशिफल

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x