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“इक परिंदे सी उड़ने लगी ज़िन्दगी” का हुआ लोकार्पण

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वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट

वाराणसी — अर्दली बाजार स्थित जिला राजकीय पुस्तकालय में रविवार को ” इक परिंदे सी उड़ने लगी ज़िन्दगी” ग़ज़ल पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर कराया गया। तत्पश्चात माता सरस्वती की वंदना कंचन सिंह परिहार द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस लोकार्पण के मौके पर पुस्तक की गजलकार छाया शुक्ला ने कहा कि इस संग्रह की गजलों में हमारे समय और समाज की अच्छी सी शिनाख्त हुई है। इसमें जीवन जगत की अनेकानेक छवियां हैं, किंतु जीवन के आकर्षक, उज्जवल और मनमोहन रूप ज्यादा चटक होकर उभरे हैं। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा”इक परिंदे से उड़ने लगी जिंदगी” नामक गजल पुस्तक का लोकार्पण किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डा.दयानिधि मिश्र ने कहा कि छाया शुक्ला की गजलें स्तरीय हैं तथा किसी वाद से प्रभावित नहीं है। शिवकुमार पराग ने कहा की छाया शुक्ला की गजलें विविध वर्णी है। वहां कई रंग मिलते हैं और कई स्वर भी। पर प्रेम उनके गजलों का मूल स्वर हैं। इस कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी संपन्न हुआ। जिसका संचालन प्रसन्न बदन चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर कंचन सिंह परिहार, आनंद कृष्ण मासूम, योगेश चतुर्वेदी, डॉक्टर नसीमा निशा, गिरिजेश तिवारी, डॉक्टर राजेश राय, एसएन उपाध्याय, डा.कविन्द्र नारायण, बुद्धदेव तिवारी, देवेंद्र पांडे, सूर्यकांत त्रिपाठी, पंकज श्रीवास्तव, वासुदेव ओबेरॉय, श्याम शंकर दुबे, विनोद कुमार वर्मा, विकास पाण्डेय, डॉक्टर महेंद्र मोहन वर्मा, शुभम पाण्डेय, पिंटू राम समेत सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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