जितेंद्र पटेल की रिपोर्ट वाराणसी मिर्जामुराद : परमात्मा एक हैं और वह सर्वत्र विद्यमान हैं।’राम’ का नाम और ईश्वर की भक्ति ही जीवन के सम्पूर्ण सुखों का आधार हैं।रामकथा जीवन जीने की कला सिखाती हैं।
उक्त विचार खोचवां गांव (रूपापुर) में डीह बाबा मंदिर पर आयोजित सप्त दिवसीय हवनात्मक रुद्र महायज्ञ एवं श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथावाचक संत नवीन जी महाराज ने व्यक्त किया।
कथावाचक ने भक्ति व प्रेम में अंतर बताते हुए कहा कि मानव तन बड़े भाग्य से मिला है।रामकथा की महिमा का बखूबी वर्णन किया।रामकथा महाप्रसाद हैं।प्रसाद को बांटकर खाना चाहिए।सत्संग के बिना ज्ञान नही होगा।ज्ञान से ही परमात्मा का दर्शन होगा।श्रीरामकथा सांयकाल से रात्रि तक चला।
इस अवसर पर संत श्रीनाल बाबा, अभय सिंह, राजेश, मुन्ना बाबू, राजू, विधान सिंह (प्रधान), राजीव, अनूप, एमपी सिंह, दिनेश (बाबा), अनिल, गोपाल शर्मा, राजन सिंह, प्रदीप फौजी, लालप्रताप (बबलू) , शैलेन्द्र सिंह ‘पिन्टू’ (पत्रकार), सभाजीत यादव, दिनेश (बल्ली), आशीष, सुशील समेत अन्य ग्रामीण महिला-पुरुष भक्तजन मौजूद रहे।