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उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति सैला नृत्य कार्यशाला का समापन

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कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट                      वाराणसी* आज दिनांक 2 जून 2026 को उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृत संस्थान ( संस्कृति विभाग ) लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में 10 दिवसीय जनजाति शैला नृत्य कार्यशाला का समापन सामुदायिक भवन बिछियारी चपकी, बभनी,सोनभद्र में हुआ l इस कार्यशाला में कल 50 जनजाति छात्र छात्राएं ने प्रतिभा किया l कार्यशाला समापन समापन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. बृजभान मरावी-*सदस्य* उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृत संस्थान,उत्तर प्रदेश सरकार रहे l उन्होंने अपने वक्तव्य में कहां की सोनभद्र जो की सांस्कृतिक रूप से संपन्न हैं l प्रदेश का सबसे अधिक आबादी वाले आदिवासी जनजाति जिला हैl जिसकी पहचान देश के कोने-कोने में इसकी प्राकृतिक आदिवासी संपदा से होती है l साथ ही साथ यहां पर निवासरत हजारों सालों से आदिवासी जनजाति समाज सांस्कृतिक मजबूती की पहचान को बना कर रखा हैं l जो देश प्रदेश आदि सभी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं l शैला नृत्य गोंड आदिवासी समाज का प्रमुख नृत्य है l जिसके संरक्षण हेतु संस्कृति विभाग के सहयोग से प्रदेश में प्रथम बार आयोजित किया जा रहा है, जिसके लिए संस्कृति विभाग को धन्यवाद करता हूं l कार्यशाला के समापन अवसर पर समाजसेवी एवं पूर्व प्रधान के नाम उनका अशोक आयाम जी विशेष अथिति के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यशाला से हमारे गांव के बच्चों का सम्मान बड़ा है एवं हमारी खत्म हो रही आदिम शैला नृत्य पुनर्जीवित होने में मजबूती मिला हैl इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुति के पश्चात प्रमाण पत्र से भी सम्मानित भी किया गया l कार्यशाला में प्रशिक्षक हरिप्रसाद, हरि नारायण राम जतन, विजय कुमार, कलंदर, श्रवण कुमार, मोहन कुमार, राकेश कुमार, दीप नारायण, आनंद कुमार कौशल्या रानी, अनीता, सबिता रंजना आदि छात्राओं ने 10 दिन रहकर शैला नृत्य की विशेषताओ को सीखाl कार्यक्रम का संचालन अखिलेश कुमार ने किया l

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