सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानियां। नगर कस्बा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रविवार को आयोजित होने वाला मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में हो रही लापरवाही और बदइंतजामी एक गंभीर चिंता का विषय है। जिससे जरूरतमंद नगर कस्बा बाजार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। राज्य सरकार की मंशा के विपरीत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर व्यवस्थाएं केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गई हैं। जिसके कारण लापरवाह चिकित्सकों एवं स्टॉफ कर्मियों के चलते रविवार 26 जुलाई की सुबह 10 बजे से लेकर 12 बजे तक प्रभारी कार्यालय में ताला लटका मिला। प्रमुख समस्याएं और जमीनी हकीकत पर चिकित्सकों का कार्य शून्य पाया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रभारी चिकित्सक के अलावा कोई भी कार्यरत चिकित्सक मौजूद नहीं रहा। और ना ही स्टॉफ एमियो का कही से अता पता चल पाया। जिसके कारण ओपीडी के अलावा फार्मासिस्ट या वार्ड बॉय भी मेले से नदारत रहे। आयोजित मेले से प्रभारी चिकित्सक डॉ रुद्रकांत सिंह के अलावा कार्यरत चिकित्सक जितेंद्र कुमार, एलिना, मनीषा सिंह एवं अन्य स्टॉफ कर्मियों का कही से अता पता नहीं चला। दूर दराज से आए मरीजों का काफी परेशान रहे। घंटों इंतजार के बाद प्राइवेट अस्पताल से इलाज कराने को मजबूर हुए। अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के तहसील अध्यक्ष मोहम्मद इजहार खान, वीरेंद्र कुमार, आलोक कुमार, सुभाष चौधरी, बबीता देवी, मंजू देवी, सुनैना देवी, राधिका देवी सहित आदि लोगों ने बताया कि मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला पहुंचकर इलाज के लिए घंटो बैठे रहे। लेकिन प्रभारी का कार्यालय पर ताला लटका रहा है। इलाज और परामर्श कराए बिना प्राइवेट अस्पताल जाकर इलाज कराने को मजबूर रहे। लोगों ने बताया कि ऐसे लापरवाह डाक्टरों ईस्वी कर्मचारियों पर विभागीय स्तर पर कार्यवाही किया जाना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के तहसील अध्यक्ष मोहम्मद इजहार खान ने बताया कि यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के नाम से चलाई गई है। और चिकित्सकों में घोर उदासीनता के चलते कार्यक्रम फ्लाप हो रही है। उन्होंने कहा कि मेले में पहुंचे मरीज वापस लौटने को विवश हुए। जबकि इस घड़ी मौसमी बीमारियों से छुटकारा दिलाने के लिए सुविधाओं का भारी अभाव बना हुआ है। इस लिए मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बराबर डाक्टर केंद्र से गायब मिलते है।