सुकन्या सिंह की रिपोर्ट . वाराणसी।काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से बिरला छात्रावास की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक महत्व एवं मूल स्थापत्य स्वरूप को संरक्षित रखने की मांग की है। इस संबंध में विद्यार्थियों द्वारा कुलपति एवं कुलसचिव को संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर छात्रावास परिसर में हो रहे निर्माण कार्यों एवं संरचनात्मक बदलावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
विद्यार्थियों का कहना है कि बिरला छात्रावास केवल एक आवासीय भवन नहीं है, बल्कि यह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा, समृद्ध इतिहास और विशिष्ट वास्तुकला का जीवंत प्रतीक है। वर्षों से यह छात्रावास अपनी पारंपरिक स्थापत्य शैली, विशाल खुले परिसर, हरित वातावरण तथा सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता रहा है। विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहरों में इसकी विशेष पहचान रही है, जिसे सुरक्षित रखना समय की आवश्यकता है।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में छात्रावास परिसर में चल रहे निर्माण कार्य एवं संरचनात्मक परिवर्तन इसके मूल स्वरूप को प्रभावित कर सकते हैं। यदि इसी प्रकार परिवर्तन जारी रहे तो छात्रावास की ऐतिहासिक पहचान, वास्तु सौंदर्य एवं प्राकृतिक वातावरण को क्षति पहुंचने की आशंका है। विद्यार्थियों ने इस बात पर बल दिया कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक इमारतों और परिसरों का संरक्षण केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के प्रति एक नैतिक जिम्मेदारी भी है।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध किया है कि बिरला छात्रावास की मूल वास्तुकला एवं पारंपरिक स्वरूप को यथावत बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही परिसर में हो रहे ऐसे सभी निर्माण कार्यों एवं संरचनात्मक बदलावों की समीक्षा कराई जाए, जो छात्रावास की ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित कर सकते हैं।
विद्यार्थियों का मानना है कि आधुनिक सुविधाओं का विकास आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए बिरला छात्रावास की विरासत, सांस्कृतिक महत्व और मूल स्थापत्य स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए सकारात्मक एवं प्रभावी निर्णय लेगा।
अंत में विद्यार्थियों ने प्रशासन से मांग की कि छात्रावास के स्थापत्य के साथ हो रहे संरचनात्मक परिवर्तनों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा किसी भी विकास कार्य से पूर्व इसकी ऐतिहासिक एवं वास्तु विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।