नवीन सिंह की रिपोर्ट वाराणसी*भारत विकास परिषद ‘सृजन शाखा’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता में 8 विद्यालयों ने लिया भाग, सेठ आनंदराम जयपुरिया द्वितीय और आर्य महिला इंग्लिश स्कूल तृतीय*
भारत विकास परिषद ‘सृजन शाखा’ की ओर से रविवार सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल तरना में राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता में शहर के 8 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग कर देशभक्ति एवं राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां दीं। प्रतियोगिता दो चरणों—हिंदी गायन एवं संस्कृत गायन—में आयोजित हुई। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों से सभागार राष्ट्रभक्ति के भाव से सराबोर हो उठा।
प्रतियोगिता में संत अतुलानंद कोयराजपुर ने प्रथम, सेठ आनंदराम जयपुरिया ने द्वितीय आर्य महिला इंग्लिश स्कूल तृतीय स्थान पर रही। उपस्थित निर्णायक मंडल ने सभी प्रस्तुतियों का बेहद बारीकी से मूल्यांकन किया। सुर-ताल, सामूहिक गायन, अनुशासन, प्रस्तुति और भावाभिव्यक्ति सहित विभिन्न मानकों के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त उपायुक्त आयकर अरविंद मोहन भटनागर रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रधानाचार्य धर्मेंद्र मेनन, प्रांतीय अध्यक्ष हरीश वालिया, डॉ. सचिन अग्रवाल, प्रांतीय संरक्षक अभय सिंह, कमलेश सिंह एवं विष्णु सेठ शामिल रहे। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में प्रतियोगिता के महत्व और उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं। तो वहीं मंच का संचालन डॉक्टर रमा सिंह एवं आकांक्षा सिन्हा द्वारा किया गया। पूरे कार्यक्रम का संचालन शाखा अध्यक्षा शशि श्रीवास्तव द्वारा किया जिसमें प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, बृजेश लाल कर्ण, नीता सिंह, रेखा शुक्ला, प्रवीण सिन्हा ,पूनम अनीता, प्रांजलि, नवीन प्रकाश और शाखा के समस्त सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
*तीन चरणों में होती है राष्ट्रीय प्रतियोगिता*
भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित यह वार्षिक राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता केवल गायन की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बच्चों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रतियोगिता का पहला चरण विद्यालय स्तर पर आयोजित होता है। इसके बाद चयनित विद्यार्थी एवं टीमें प्रदेश स्तर पर प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमें अंतिम चरण में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पहुंचती हैं, जहां पूरे भारतवर्ष से विद्यार्थी प्रतिभाग करते हैं।
कार्यक्रम में परिषद के पदाधिकारियों ने भारत विकास परिषद की विकास यात्रा एवं उसके मूल उद्देश्यों से भी उपस्थित लोगों को परिचित कराया। उन्होंने परिषद के मूल मंत्र ‘संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण’ को समाज एवं राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम के अंत में विजेता विद्यालयों सहित सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर बच्चों का उत्साह वर्धन किया आयोजकों ने कहा कि बच्चों में संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के बीज बचपन से ही रोपित करना आने वाली पीढ़ी को मजबूत राष्ट्र के निर्माण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।