वाराणसी काशी दीप विजन । चितईपुर थाना क्षेत्र का विश्वकर्मा नगर आज विकास के तमाम दावों की हकीकत बयां कर रहा है। लंबे समय से यहां के लोग खुले नालों और चोक सीवर लाइन की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। कॉलोनी की सड़कों पर हर समय गंदा पानी, कीचड़ और कचरे का अंबार लगा रहता है, जिससे स्थानीय लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। यह समस्या अब सिर्फ गंदगी तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक बड़े जन स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है।स्थानीय लोगों के अनुसार कॉलोनी में व्यवस्थित सीवर लाइन है ही नहीं। घरों का पानी नालियों में जाता है और नालियां जाम होने के कारण वही गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है। सुबह-शाम स्कूल जाने वाले बच्चों, बाजार जाने वाली महिलाओं और बुजुर्गों को इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार तो फिसल कर गिरने से लोग चोटिल भी हो चुके हैं।
स्थानीय निवासी नीलम सिंह ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम के अधिकारियों, पार्षद, विधायक और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिया गया, उनसे मुलाकात की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, यहां भाजपा के ही मेयर, विधायक और मंत्री हैं, इसके बावजूद अगर लोग नाली और सीवर जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान हैं तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
बारिश के मौसम में तो विश्वकर्मा नगर की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। थोड़ी सी बारिश में ही नालियों का पानी उफन कर घरों के सामने भर जाता है। कई घरों में गंदा पानी घुस जाता है। जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और डेंगू, मलेरिया, डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।अब विश्वकर्मा नगर के जागरूक नागरिकों ने एकजुट होकर महापौर और नगर आयुक्त से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
लोगों की दो प्रमुख मांगे हैं
1. विश्वकर्मा नगर में जल्द से जल्द नई सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू कराया जाए और खुले नालों को ढका जाए ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
2. जब तक सीवर लाइन का कार्य पूरा नहीं होता, तब तक नगर निगम द्वारा क्षेत्र के लोगों के लिए रियायती दर पर सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए टैंकर की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
क्षेत्र के लोगों ने कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन की बात करने वाले शहर में अगर लोग गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं तो यह विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग विश्वकर्मा नगर के लोगों की इस जायज मांग पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और उन्हें इस नारकीय जीवन से कब तक मुक्ति दिलाता है।