वाराणसी।काशी दीप विजन पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में हरतालिका तीज के पावन अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में भगवान शिव एवं माता शक्ति का विशेष पूजन-अर्चन एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और चतुर्वेद स्वस्ति उद्घोष के बीच पूरे विधि-विधान से पूजन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। हरतालिका तीज का पर्व शिव के साथ शक्ति की आराधना का पर्व है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए यह पर्व श्रद्धा, तप, निष्ठा और अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि हरतालिका तीज के अवसर पर शिव-शक्ति के मंडप पूजन, स्तंभ पूजन, वेदियों के पूजन, वैदिक पाठ एवं हवन का विशेष महत्व है। पूजन-पाठ के उपरांत हवन तथा सायंकाल आरती का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम गौरी-गणेश के पूजन के साथ चतुर्वेद स्वस्ति उद्घोष के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ।
अनुष्ठान के अंतर्गत मंडप, स्तंभ एवं विभिन्न वेदियों का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद विद्वान आचार्यों एवं वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रों और धार्मिक पाठ का उच्चारण किया गया। मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। पाठ के समापन के बाद विधि-विधानपूर्वक हवन किया गया, जिसमें लोककल्याण, राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं सभी श्रद्धालुओं के मंगल की कामना से आहुतियां अर्पित की गईं। सायंकाल भगवान शिव एवं माता शक्ति की आरती के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
अनुष्ठान का संचालन यज्ञाचार्य तेजमणि त्रिपाठी के आचार्यत्व में हुआ। उनके निर्देशन में 36 विद्वान पंडितों एवं वेदपाठी ब्राह्मणों ने वैदिक विधि-विधान से पूजन, पाठ एवं हवन संपन्न कराया। पूरे आयोजन में शास्त्रीय परंपराओं और वैदिक विधान का विशेष रूप से पालन किया गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव एवं माता पार्वती का दर्शन-पूजन कर अखंड सौभाग्य, सुख-शांति और परिवार के मंगल की कामना की। हरतालिका तीज के अवसर पर आयोजित इस विशेष अनुष्ठान से आदि शंकराचार्य महासंस्थानम का वातावरण पूरे दिन आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना रहा।