वाराणसी। कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट *वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में जहां एक ओर व्यवस्था को पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए थाना प्रभारियों और चौकी प्रभारियों के तबादले समय–समय पर किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर थानों और चौकियों पर तैनात ‘कारखास‘ और सिपाहियों का लंबे समय से न हटाया जाना अब चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कमिश्नरेट के कई थानों और चौकियों पर कुछ सिपाही और ‘कारखास‘ पिछले 4 से 5 सालों से भी अधिक समय से एक ही स्थान पर डटे हुए हैं। अगर एक नजर देखा जाए तो लंका मडुवाड़ीह चितईपुर भेलूपुर भेलूपुर चेतगंज बड़ागांव रोहनिया रामनगर मिर्जामुराद कैंट शिवपुरआदि क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है
थाना प्रभारियों और चौकी प्रभारियों का स्थानांतरण तो नीतिगत नियमों के तहत नियमित रूप से कर दिया जाता है, लेकिन निचले स्तर के इन कर्मचारियों को आखिर किस वजह से स्थिर रखा गया है, यह सवाल अब पुलिस महकमे के साथ-साथ आम जनता के बीच भी उठने लगा है। किसी एक ही स्थान पर इतने लंबे समय तक तैनाती रहने से न केवल स्थानीय स्तर पर साठगांठ और अनैतिक नेटवर्क बनने की संभावनाएं बढ़ती हैं, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े होते हैं।
अधिकारियों के लगातार बदलने के बावजूद निचले स्तर के कर्मियों का फेरबदल न होना प्रशासनिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। अब देखना यह होगा कि वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट का उच्च प्रबंधन इस मामले का संज्ञान लेकर सालों से जमे इन कारखास और सिपाहियों के तबादले की दिशा में क्या ठोस कदम उठाता है।