2–भारत के पू्र्व सातवें राष
वाराणसी — चौकाघाट स्थित विश्वकर्मा पंचायती बाग में गुरुवार को विश्वकर्मा समाज द्वारा भारत सरकार के सातवें पूर्व राष्ट्रपति एवं विश्वकर्मा वंशी समाज के गौरव ज्ञानी जैल सिंह की पूण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी और एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वकर्मा सभा के नवनियुक्त अध्यक्ष अमरनाथ विश्वकर्मा के नेतृत्व में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वकर्मा समाज के गौरव एवं संस्थापक प्रथम अध्यक्ष रहे डॉक्टर एस. नाथ के तैल चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया गया। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के महानगर अध्यक्ष विष्णु शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक है कि देश की सर्वोच्च पद पर आसीन रहे स्वर्गीय ज्ञानी जैल सिंह का नाम और उनकी सामाजिक पहचान को योजनाबद्ध तरीके से इतिहास के हासिये पर धकेल दिया गया। यह केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे विश्वकर्मा समाज की उपेक्षा है। विश्वकर्मा समाज के नवनियुक्त अध्यक्ष अमरनाथ विश्वकर्मा ने कहा कि स्व.ज्ञानी जैल सिंह का जीवन संघर्ष सादगी और राष्ट्र भक्ति का प्रतीक रहा है।उनका राष्ट्रपति बनना विश्वकर्मा समाज ही नहीं बल्कि पूरे शिल्पकार समाज के लिए एक एतिहासिक उपलब्धि थी जिसे भावी पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने ज्ञानी जैल सिंह के जीवन दर्शन, सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्रद्धांजलि सभा में यह संकल्प लिया गया कि विश्वकर्मा समाज के महापुरुषों को पाठ्यक्रमों में उचित स्थान दिलाने हेतु आंदोलन किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष ज्ञानी जैल सिंह की पुण्यतिथि को समाजवादी जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, पूर्व अध्यक्ष रामचंद्र शर्मा, सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष विष्णु शर्मा, रघुवर दास विश्वकर्मा, सुशील विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, अनिल शर्मा, राजकुमार विश्वकर्मा, युगल किशोर विश्वकर्मा, शशिधर पंचगौड़ विश्वकर्मा, नित्यानंद विश्वकर्मा, वेंकटेश विश्वकर्मा, घनश्याम विश्वकर्मा, रामदुलार विश्वकर्मा, डॉक्टर सुनील विश्वकर्मा, गोपाल विश्वकर्मा,कन्हैया विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट वाराणसी