गुफरान अहमद की रिपोर्ट मिर्जापुर
मिर्जापुर कलेक्ट्रेट परिसर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के विरोध में सवर्ण आर्मी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। जोरदार नारेबाजी करते हुएराष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को संबोधित पत्रक जिला प्रशासन को सौंपा। वक्ताओं ने नए प्राविधान को समाप्त किए जाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज में आपसी सौहार्द को समाप्त करने के लिए सरकार के द्वारा लाया गया यह काला कानून हैं। इसे लेकर गंभीर संवैधानिक एवं विधिक प्रश्न खड़ा हो गया है।यूजीसी की यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित होने के कारण समाज में जातीय भेदभाव को बढ़ाने वाली होगी। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। जिसकी आड़ में दुरुपयोग अन्य कानून की तरह किए जाने की आशंका है। देशभर के सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है। इन कमेटियों को भेदभाव से संबंधित शिकायतों की जांच करने का अधिकार दिया गया है। फर्ज़ शिकायत करने वालों पर कार्रवाई किए जाने का कोई प्राविधान नहीं है। स्वर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष मुकेश पाण्डेय ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह अधिसूचना अत्यंत गंभीर संवैधानिक और विधिक पहलुओं को जन्म देती है, जिन पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता और न्याय आवश्यक है, लेकिन किसी भी व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके दूरगामी प्रभावों पर विचार किया जाना चाहिए।
यूजीसी की इस अधिसूचना को लेकर शैक्षणिक जगत और सामाजिक संगठनों में अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक बहस तथा प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।