UGC का नया कानून : समानता, सवर्ण समाज और हिंदू एकता को विद्वीरन करता हुआ,,,,,रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम
भारत जैसे प्राचीन, विविधतापूर्ण और सभ्यतागत राष्ट्र में शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण भी करती है।*
*हाल ही में लागू UGC का नया “ कानून इसी उद्देश्य से लाया गया बताया गया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव समाप्त हो।परंतु इसके लागू होने के साथ ही सवर्ण (General Category) समाज में असंतोष, भय और विरोध की भावना उभर कर सामने आई है। रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि क्या यह कानून वास्तव में समानता की दिशा में है, या यह नए प्रकार के सामाजिक विभाजन को जन्म दे सकता है?*
*💥1. UGC का नया कानून क्या है?*
*UGC का नया कानून उच्च शिक्षा संस्थानों में कथित जातिगत, सामाजिक, लैंगिक और अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है।*
*इसके अंतर्गत:*
*हर विश्वविद्यालय/कॉलेज में शिकायत दर्ज करने के लिए विशेष तंत्र और त्वरित जांच की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसका उद्देश्य (सरकारी दृष्टिकोण से):कमजोर वर्गों के छात्रों को सुरक्षा देना।शिक्षा को “सुरक्षित और समावेशी” बनाना रखा गया है।*
कानून की मूल भावना और वास्तविक चिंता
*सैद्धांतिक रूप से भेदभाव-विरोधी कानून नैतिक और संवैधानिक रूप से सही है।परंतु समस्या नियत से अधिक प्रक्रिया और संरचना को लेकर है।रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि यहीं से सवर्ण समाज की चिंता प्रारंभ होती है।*
*💥3. सवर्ण समाज को संभावित नुकसान (मुख्य बिंदु)(क) दोष सिद्ध होने से पहले दोषी मान लेने की आशंका,,,नए नियमों की भाषा और प्रक्रिया से यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि:आरोप लगते ही व्यक्ति संदेह के घेरे में आ जाता है“निर्दोष साबित होने” का भार आरोपी पर डाल दिया जाता है।*
*उदाहरण:*
*कक्षा में अकादमिक बहस या अनुशासनात्मक टिप्पणी को भी “जातिगत उत्पीड़न” बताकर शिकायत की जा सकती है।(ख) झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों का दुरुपयोग,,,कानून में झूठी शिकायत करने पर स्पष्ट दंड का अभाव।इससे भय का वातावरण बन सकता है।शिक्षक और छात्र खुलकर संवाद करने से कतराने लगेंगे।*
*परिणाम:*
*शिक्षा का वातावरण ज्ञान से अधिक सतर्कता और भय से भर सकता है।*
*(ग) प्रतिनिधित्व में असंतुलन,,,Equity Committees में सभी सामाजिक वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व स्पष्ट नहीं इससे “एकतरफा निर्णय” का संदेह जन्म लेता है।*
*न्याय तभी न्याय होता है, जब वह निष्पक्ष दिखाई भी दे।*
*4. आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश जाता है?सकारात्मक संदेश यह जाता है कि भेदभाव गलत है हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है।संस्थान जिम्मेदार हैं।*
*नकारात्मक संदेश (यदि संतुलन न रहा तो)समाज स्थायी रूप से “पीड़ित” और “आरोपी” वर्गों में बंटा है संवाद के स्थान पर शिकायत प्राथमिक साधन है।पहचान योग्यता से ऊपर है।यह दृष्टिकोण हिंदू समाज की पारंपरिक ‘समरसता’ की भावना के विपरीत जाता है।*
*💥5. हिंदू एकता के संदर्भ में प्रभाव,,,हिंदू समाज का मूल दर्शन —“वसुधैव कुटुम्बकम्”“सर्वे भवन्तु सुखिनः”होता है। रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि यदि कानून:जाति को बार-बार पहचान का केंद्र बनाएऔर साझा सांस्कृतिक चेतना को कमजोर करे।तो यह हिंदू एकता को मजबूत करने के बजाय खंडित कर सकता है।*
*क्योंकि एकता भय से नहीं, विश्वास से बनती है।*
*💥6. भारत जैसे राष्ट्र के लिए — हितकर या अहितकर?”हितकर तब होगा जब:*
*निष्पक्ष जांच हो*
*1झूठी शिकायतों पर भी कार्रवाई हो*
*2 सभी वर्गों की गरिमा सुरक्षित रहे*
*3कानून शिक्षा को जोड़ने का माध्यम बने,अहितकर तब होगा जब:यह कानून राजनीतिक या वैचारिक हथियार बन जाए!संस्थानों में अविश्वास फैले समाज में स्थायी विभाजन गहरा हो*
*💥7. सवर्ण विरोधाभास और केंद्र सरकार के लिए चुनौती,,,सवर्ण समाज का विरोधाभास यह कि संविधान में आस्था भी समानता में विश्वास भी परंतु “चयनात्मक न्याय” का भय भी बना रहेगा। केंद्र सरकार के लिए खतरा,,,,यदि असंतोष को अनदेखा किया गया तो यह राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर व्यापक असंतुलन पैदा कर सकता है।खासकर उस सरकार के लिए जो “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है*
*💥8. समाधान की दिशा (संतुलित मार्ग)झूठी शिकायतों पर स्पष्ट दंड,, इस संदर्भ में रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि इसमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व,पारदर्शी जांच प्रक्रिया,संवाद और सुलह को प्राथमिकता,जाति नहीं, न्याय को केंद्र में रखना होगा।रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम निष्कर्ष रूप से लेखबद्ध करती है कि UGC का नया कानून न तो पूर्णतः गलत है, न ही पूर्णतः सही।इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि —क्या यह समानता लाता है या विभाजन?क्या यह विश्वास बनाता है या भय?यदि इसे संतुलन, संवेदनशीलता और समरसता के साथ लागू किया गया,तो यह भारत की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा।अन्यथा यह सामाजिक ताने-बाने के लिए चुनौती बन सकता है। और इसका विरोधाभास का सामना काला दिवस के रूप में संपूर्ण राष्ट्र में सरकार को उठाना होगा इसलिए इस नए कानून यू जी सी को लागू करने से रोकना होगा या इस पर पुर्नविचार करना होगा। यह सवर्ण सामान्य जाति के साथ ही अन्याय नहीं है यह संपूर्ण राष्ट्र के लिए हिंदू जाति को तोड़ने विखंडन करने का कानून है इसलिए इसका विरोध करना सार्थक होगा।इसलिए हम सभी को आने वाली भावी पीढ़ी एवं वर्तमान पीढ़ी के लिए एकजुटता का परिचय देते हुए जागना होगा।अभी नहीं तो कभी नहीं।*
*✍️ रवींद्र सिंह (मंजू सर )मैहर, राष्ट्रीय अधिमान्य पत्रकार संगठन मध्यप्रदेश सचिव एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन (ए ) नई दिल्ली मध्यप्रदेश उपाध्यक्ष ,एवं प्रेस मीडिया पत्रकार कल्याण संघ प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय रेलवे उपभोक्ता संरक्षण सलाहकार फोरम नई दिल्ली राष्ट्रीय सयुक्त सचिव,एवं सर्वजन न्यायमंच नई दिल्ली राष्ट्रीय सचिव एवं जिला, संभागीय संवाददाता ब्यूरो जिला मैहर 8770112319,9993510721*