सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया
जमानियां। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत का बजट 2026 पेश किया। उन्होंने अपने बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया है जो वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है। विनिर्माण में तेजी की मंशा, आई टी क्षेत्र को बढ़ावा देने की पहल, कैंसर की 17 दवाओं के मूल सीमा शुल्क में छूट, किसान और युवाओं के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में प्रस्तावित कार्य के मैं इसे संतुलित बजट मानता हूं। प्रो, अनिल कुमार सिंह
अर्थशास्त्री एवं कृत कार्य प्राचार्य, हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय जमानियां गाज़ीपुर। फोटो
इस बजट में युवाओं, महिलाओं एवं किसानों सहित इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों पर किया गया फोकस सराहनीय है। यदि सभी योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया गया तो आम लोगों को इसका लाभ अवश्य मिलेगा। मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार बजट के नतीजे ज़मीन पर दिखाने में सफल रहेगी और इसका लाभ खासोआम को मिल सकेगा। फोटो
प्रो. शरद कुमार अर्थशास्त्री
पूर्व प्राचार्य, हिंदू पी जी कॉलेज, जमानियां, गाज़ीपुर
इस वर्ष (2026-27) का केंद्रीय बजट 53.47 लाख करोड़ रुपये का है, जो जीडीपी का लगभग 13.6% है। पिछले साल (2025-26) के संशोधित अनुमान 49.65 लाख करोड़ से 7.7% की वृद्धि दर्शाता है।बजट में डिफेंस पर मजबूत फोकस है, जबकि कैंसर दवाओं की 17 कीमतों में कमी की गई। लेकिन आम आदमी, ग्रामीण विकास, युवा रोजगार और एमएसएमई पर ज्यादा ध्यान नहीं—एमएसएमई के लिए सिर्फ 10,000 करोड़ का प्रावधान।राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% रखा गया है।समस्या ये है कि आर्थिक वृद्धि के बावजूद असमानता बनी हुई है।10% आबादी खपत पर काबिज है, गरीबी-बेरोजगारी और अनौपचारिक श्रम जारी है। विनिर्माण क्षेत्र जीडीपी में सिर्फ 14% है, जो रोजगार-रहित विकास दे रहा। श्रम-प्रधान मैन्युफैक्चरिंग का बड़े पैमाने पर विस्तार ही जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा उपयोग कर सकता है और लाखों नौकरियां पैदा कर सकता है। संक्षेप में: डिफेंस मजबूत, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण भारत को प्राथमिकता की ज्यादा जरूरत है। फोटो डॉ ओमप्रकाश लाल श्रीवास्तव
सहायक आचार्य अर्थशास्त्र विभाग
हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय जमानियां गाजीपुर
बजट में विकास के इंजन कृषि के समावेशी उन्नयन पर बल देते हुए उच्च पैदावार, किसान क्रेडिट कार्ड के ऋण सीमा बढाने, अनाज एवं फल सब्जी के भण्डारण तथा निर्यात पर जोर देने से ग्रामीण समृद्धि बढेगी जिसका सकारात्मक प्रभाव सकल घरेलू उत्पाद पर पडेगा। राष्ट्र को और मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिरता के सुदृढ़ता हेतु रक्षा और सुरक्षा में अधिक आत्मनिर्भरता का प्रयास है। अत्यंत कम बाधाओं के साथ उद्यम के विस्तार का प्रयास अत्यंत सराहनीय है तथा राजस्व व्यय को बढ़ावा मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे जो इस बजट का सकारात्मक पहलू है। फोटो
डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह
सहायक आचार्य, अर्थशास्त्र
हिंदू पी.जी.कॉलेज
जमानियां गाज़ीपुर।