सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। बिहार और यूपी की सीमा पर, विशेषकर बरौरा नदी क्षेत्र में पुलिस की मिलीभगत से रात्रि समय में बड़े वाहनों ट्रकों/ट्रैक्टरों के जरिए जमानियां क्षेत्रों में अवैध बालू की खेप करते सामने आती जाती रहती हैं। बालू माफिया रात के अंधेरे में सैकड़ों नावों, ट्रैक्टरों और ट्रकों का उपयोग करके अवैध रूप से देवैथा बड़ी नहर पुलिया होते खनन और परिवहन रात्रि समय सरेआम करते देखे जा सकते हैं। पुलिस की मिलीभगत से अक्सर पुलिस स्टेशन के पास से ही बालू से लदे वाहनों से अवैध पार्किंग शुल्क वसूले जाने की बात सामने आती है। यह अवैध कारोबार बिहार के सोन नदी और बरौरा नदी अवैध बालू खनन फैला हुआ है। जहां बड़ी मात्रा में बालू की आपूर्ति की जाती है। जानकारियां इस प्रकार हैं। रात में बड़े वाहनों और ट्रकों के जरिए अवैध बालू का परिवहन धड़ल्ले से किया जाता है। अजय कुमार, भाजपा व्यापार मंडल के जिला युवा उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, गिरधारी सिंह, सहित आदि लोगों ने बताया कि पुलिस कर्मी इन अवैध गतिविधियों को अनदेखा करने के लिए मोटी रकम पार्किंग मनी के तौर पर वसूलते हैं। यह अवैध कारोबार स्थानीय पर्यावरण और बिहार और यूपी राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए दंड को कठोर बनाने के लिए दोनों सरकार को कदम उठाने की जरूरत है। जिसमें 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान करना चाहिए। लोगों ने बताया कि ऐसे मामलों की सूचना मिलने पर प्रशासन द्वारा छापेमारी की जाती है। और वाहनों को जब्त भी किया जाता है। इसके बाद भी यह नेटवर्क बिहार और उत्तर प्रदेश पुलिस की मिलीभगत से सरेआम चलता रहता है। रात्रि समय में अवैध बालू लड़े वाहन बिहार से जमानियां के लिए आते हुए। इस बाबत कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राम सजन नागर ने बताया कि जो भी पुलिस कर्मी इस तरह के अवैध कार्य में सम्मिलित पाए जाने की शिकायत अगर मिलता है। जांच कर उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर अवश्य कार्यवाही की जाएगी।