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काशी विद्यापीठ : ललित कला विभाग में तीन दिवसीय तरंगिणी कला प्रदर्शनी का हुआ उद्घाटन

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दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट

वाराणसी। ललित कला विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश एवं चित्रकला विभाग, महिला महाविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में शुक्रवार को महिला कलाकारों की तीन दिवसीय तरंगिणी कला प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। ललित कला विभाग के आजाद कला दीर्घा में आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. मृदुला सिंहा, पूर्व विभागाध्यक्ष, चित्रकला विभाग, दृश्य कला संकाय ने कहा कि कला समाज का दर्पण होता है, आज हम कलाकार जो कुछ बनाते हैं उसमें समाज की आवाज आ ही जाती है। उन्होंने कहा महिला कलाकारों की वेदना कहीं ना कहीं समाज को प्रेरित देती है। प्रो. सिंहा ने कहा कि आज की महिलाएं के रूप अनेक हैं, जो यहां चित्रों में दिखाई देते हैं।

विशिष्ट अतिथि महिला महाविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्राचार्य प्रो. रीता सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला चित्रकार के चित्रों में महिला सशक्तिकरण बनाया है, जो काफी सुंदर और समाज को प्रेरणादायी होगा। राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने कहा यह प्रदर्शनी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश के 07 क्षेत्रों में होने वाली है, जिसमें पहली प्रदर्शनी आजाद कला दीर्घा से आरंभ हुई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 8 मार्च को राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश में प्रदेश के 27 महिला कलाकारों को इन्ही प्रदर्शनी में से चुनकर उन्हें लखनऊ में सम्मानित किया जाएगा।

प्रदर्शनी में प्रो. सरोज रानी ने अपने चित्रों का विषय ब्रेड मिनर रखा है। उन्होंने देह व्यापार में लिप्त महिला को दर्शाया है। नीतू वर्मा ने अपने चित्र में भगवान राम की प्रतिमा को लाइन ड्राइंग के माध्यम से चित्रित किया है। उन्होंने अपने विषय में लोक कला का भी समावेश किया है। शिवानी कुमारी ने काशी में शिव नंदी और उनके त्रिशूल को कोलाज माध्यम से पुराने शहर को दर्शाने का प्रयास किया है। अंजना मौर्या ने कृष्ण लीला को मधुबनी शैली में सिल्क कपड़े पर बनाया है। प्रो. मंजुला चतुर्वेदी ने प्रकृति और महिला को दर्शाया है। तारा कुमारी ने वाराणसी घाट को लैंडस्केप में बनाया है। वर्षा सिंह ने वाराणसी घाट के किनारे फूल माला के दुकानों को दर्शाने का प्रयास किया है। सीमा गुप्ता ने अपने चित्रों में एक महिला को ध्यान मुद्रा में दर्शाया है। दीक्षा जायसवाल ने तीन चित्र में अलग-अलग मूड को दर्शाया है।

अतिथियों का स्वागत संयोजिका प्रो. सरोज, संचालन डॉ.श्वेता मौर्या एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जयंती मंडी ने किया। इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार कुशवाहा, डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद, डॉ. जयंती मंडी, डॉ. श्वेता मौर्या, डॉ. स्नेहलता कुशवाहा, डॉ. परवीन सुल्ताना, एस. एंजेला, शालिनी कश्यप, डॉ. सविता यादव, आकांक्षा, विशाल, वैष्णवी, सौरभ आदि उपस्थित रहे।

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