सुकन्या सिंह की रिपोर्ट वाराणसी
वाराणसी-सुप्रीम कोर्ट आज उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली, 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। 2012 के पुराने नियम ही फिलहाल लागू रहेंगे। इस पर रोक लगाने के लिए याचिका डालने वाले बीएचयू के शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी ने न्यायालय को धन्यवाद कहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारी पहली जीत है। लेकिन हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार इन नियम में बदलाव नहीं करता।5 हजार स्टूडेंट्स क्लास छोड़कर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे है। इस दौरान पुलिस से छात्रों की झड़प हो गई। मौके पर तीन थानों की फोर्स लगाई गई है। लगभग 500 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
आपको बता दें कि यूजीसी के इन नए नियमों पर आरोप लगाया गया था कि ये सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ इन रिट याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिका में दावा है कि नए नियमों से भेदभाव बढ़ेगा।
कोर्ट ने भी इस बात से सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘क्या हम उल्दी दिशा में जा रहे हैं? हमें जातिविहीन समाज की तरफ बढ़ना चाहिए। जिन्हें सुरक्षा चाहिए उनके लिए उचित व्यवस्था हो।’
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र प्रवीण पाठक ने कहा – हमने 15 फरवरी को या याचिका दायर की थी 24 को फाइल हो गई थी और 29 जनवरी यानी आज का तारीख मिला था इस याचिका को डालने वाला में पहला स्टूडेंट था। मेरे खिलाफ सोशल मीडिया में तमाम पोस्ट भी चलाए गए। मेरी बात बहुत से लोगों ने याचिका को डाला आज सुप्रीम कोर्ट ने सभी को एक साथ सुना। हमें खुशी है कि हमारे अपील को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले से रोक लगाने की बात कही है।अब लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा आंदोलनपाठक ने कहा कि हम विश्वविद्यालय में आज शांति मार्च निकालने जा रहे हैं यह मार्च सरकार के खिलाफ है। जिसमें हम मांग करते हैं कि अब सरकार भी इस नियम को समाप्त करने की नोटिफिकेशन जारी करते तब हमारी फाइनल जीत होगी। उन्होंने कहा कि हमारे साथ कई ऐसे स्टूडेंट है जो इस नियम के आने के बाद काफी भय में थे। उनका कहना था कि इस नियम के अनुसार तो हम पहले ही दोषी हो जाएंगे। हम सरकार से अपील करते हैं कि ऐसे नियम न लागू किए जाएं जिससे आपस में विद्रोह हो।