जौनपुर राजेश पटेल की रिपोर्ट 30वां दीक्षांत समारोह सोमवार को शिक्षा, प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का ऐतिहासिक साक्षी बना। पूरे परिसर में उत्साह, ऊर्जा और गौरव का एक ऐसा वातावरण दिखाई दिया, जिसने यह संदेश दिया कि जौनपुर की धरती केवल इतिहास की नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ने वाली प्रतिभाओं की भी धरती है।
समारोह की मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावी छात्र-छात्राओं को 83 स्वर्ण पदक तथा 339 उपाधियां प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, एनसीसी के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर गौरव गौतम, विश्वविद्यालय के कुलपति, शिक्षकगण, शोधार्थी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री लेने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति नई जिम्मेदारियों का संकल्प लेने का पर्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने में करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है। जब उसका लाभ आम जनमानस तक पहुंचे और उससे देश मजबूत बने।
राज्यपाल ने विशेष रूप से बेटियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, न्यायपालिका, अनुसंधान और तकनीक सहित हर क्षेत्र में नए इतिहास रच रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा शक्ति और नारी शक्ति मिलकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के संकल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी सफलता के पीछे माता-पिता के संस्कार, गुरुजनों का मार्गदर्शनऔर विश्वविद्यालय की शिक्षा का अमूल्य योगदान होता है। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में बेटियों द्वारा गोल्ड मेडल प्राप्त करना पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया।पूरा विश्वविद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट, सम्मान के गौरव और भविष्य के सपनों से गूंज उठा। मेधावी विद्यार्थियों की मुस्कान, अभिभावकों की आंखों की चमक और शिक्षकों के चेहरे पर संतोष इस बात का प्रमाण थे कि शिक्षा ही वह शक्ति है। जो समाज और राष्ट्र की दिशा बदल सकती है।पूर्वांचल विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह केवल उपाधियों का वितरण नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के सपनों, संकल्पों और विकसित भारत के भविष्य का भव्य उद्घोष बन गया। जौनपुर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे प्रदेश को यह संदेश दिया कि जब शिक्षा, संस्कार और संकल्प एक साथ चलते हैं। तब राष्ट्र प्रगति की नई इबारत लिखता है।