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उत्तर प्रदेश मौजूदा सरकार से एक विशेष आग्रह

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खाकी वर्दी में रील बनाने पर लगे रोक समाज पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन हाल के दिनों में खाकी वर्दी पहनकर रील बनाने की प्रवृत्ति ने एक गंभीर सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया, बल्कि अब यह अनुशासन और मर्यादा से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

खाकी वर्दी, जो कानून और व्यवस्था का प्रतीक मानी जाती है, उसका उपयोग मनोरंजन या लोकप्रियता पाने के लिए करना कई सवाल खड़े करता है। जब कोई व्यक्ति पुलिस की वर्दी में फिल्मी गानों या ट्रेंडिंग डायलॉग्स पर रील बनाता है, तो इससे वर्दी की गरिमा प्रभावित होती है। समाज में पुलिस के प्रति जो सम्मान और विश्वास है, वह भी धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ सकता है। कलमकार अमित पाठक का मानना है कि वे इसे एक फैशन या स्टाइल के रूप में अपनाने लगते हैं, जबकि वर्दी का असली मतलब जिम्मेदारी, सेवा और अनुशासन होता है। इस तरह की रील्स कहीं न कहीं असली कर्तव्यों से ध्यान भटकाने का काम करती हैं।

कई सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने इस पर सख्त नियम बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि खाकी वर्दी का इस्तेमाल केवल आधिकारिक कार्यों के लिए ही होना चाहिए, न कि निजी प्रचार या मनोरंजन के लिए। यदि इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों की सोच पर भी पड़ सकता है। अब आवश्यकता है कि प्रशासन इस विषय को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि वर्दी की गरिमा बनी रहे और समाज में सही संदेश जाए।

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