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एक कहावत है होम करे हाथ जले, और यह कहावत एक दरोगा जी के साथ चरितार्थ हो गई

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साभार🙏एक कहावत है होम करे हाथ जले, और यह कहावत एक दरोगा जी के साथ चरितार्थ हो ग। दरअसल एक दरोगा हैं, ब्राम्हण हैं, मेरे मित्रवत हैं। ब्राम्हण का जिक्र इसलिए क्योंकि इस पूरी कहानी में जाति की भूमिका अहम है। बीते दिनों शहर के एक परीक्षा केंद्र पर उनकी ड्यूटी लगी थी। वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ ड्यूटीरत थे। उसी दौरान परीक्षा देने आए चार-पांच लड़के हड़बड़ी में बाहर आए। दरोगा जी ने उनसे पूछ लिया क्या हुआ भाई, बाहर क्यों आ गए लड़कों ने बताया सर, पेपर का समय हो गया है, लेकिन अंदर से आदेश है कि कलाई में बंधा कलावा निकालकर ही प्रवेश मिलेगा। हम लोगों ने निकालने की कोशिश की, लेकिन नहीं निकल रहा।

अब दरोगा जी को लगा कि ऐसे में समय बर्बाद होगा और बच्चों का पेपर छूट जाएगा। उन्होंने मदद के उद्देश्य से पास की दुकान से कैंची लाकर लड़कों का कलावा काटना शुरू कर दिया। बगल में एक ब्राम्हण पत्रकार खड़ा था, उसने तुरंत इसका वीडियो बना लिया। दरोगा जी ने पूछा भाई वीडियो क्यों बना रहे हो? उसने कहा आप मदद कर रहे हैं, इसलिए बना रहा हूं। दरोगा जी ने मना भी किया कि भाई आप इसे चलाना मत, लोग गलत मतलब निकालेंगे और मुझे दिक्कत हो जाएगी। पत्रकार ने आश्वस्त भी किया कि ऐसा नहीं करेगा। लेकिन आप जानते ही हैं, कुछ पत्रकारों को ‘चुल्ल’ होती है। उस पत्रकार ने वीडियो वायरल कर दिया।

नतीजा यह हुआ कि दरोगा जी को लाइन हाजिर कर दिया गया। उन्हें धर्मद्रोही जैसा माहौल बना गया।और अचानक से हिंदुत्व के ठेकेदार सक्रिय हो गए। गनीमत यह रही कि दरोगा जी ब्राम्हण थे। अगर कोई मुस्लिम, यादव या अन्य समुदाय का होता, तो वही लोग उसे पक्का धर्मद्रोही घोषित कर देते और लाइन हाजिर की जगह सीधा निलंबन भी संभव था। वहीं वहां मौजूद एक-दो मुस्लिम दरोगा हालात की संवेदनशीलता समझते हुए इस तरह की मदद से दूर रहे, वरना आप समझ ही सकते हैं कि मामला किस दिशा में जाता

दूसरी बात यह कि दरोगा और पत्रकार दोनों ब्राम्हण थे। अगर पत्रकार किसी अन्य जाति का होता, तो कहानी को और अलग रंग दिया जाता और धर्म-जाति के ठेकेदारों को नया नैरेटिव गढ़ने का मौका मिल जाता। इसलिए दरोगई में खासकर धार्मिक संवेदनशील मामलों में बेहद सावधानी जरूरी है। मसला कुछ और होता है, लेकिन उसे पेश कुछ और तरीके से किया जाता है। पहले आप कार्रवाई की जद में आते हैं, आपका पक्ष बाद में सुना जाता है। दरोगा जी चले थे मदद करने मगर मदद में मगज खराब हो गया।

नोट-तस्वीर एआई से बनी है मगर फिर भी चेहरा ब्लर कर दिया,ताकि लोग कन्फ्यूज न हों।

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